विचरण करते पशु-पक्षी (भाग-2)

आनंद गहलोत भारत में जो हालत प्राचीनतम ‘उक्षन्’ शब्द की हुई वही दूसरे प्राचीनतम ‘अश्व’(घोड़ा) की भी हुई. ईरानी भाषाओं में ‘अश्व’ थोड़ा-सा ध्वनि भेद होकर ‘अस्प’ रूप में आम बोलचाल का शब्द है. लेकिन भारत में जनसामान्य की भाषा…

विचरण करते पशु-पक्षी (भाग-1)

आनंद गहलोत विश्व की अधिकांश भाषाओं में पशुवाची शब्दों का रक्त सम्बंध रहा है- गो (गाय) और अंग्रेज़ी की ‘काउ’ की तरह. संस्कृत का उक्षन् (बैल) यूरोप में ‘ऑक्सेन’ हो गया. संस्कृत का ‘उष्ट्र’ फ़ारसी में ‘उश्तुर’ हो गया. अरब…

गिनती के शब्द

आनंद गहलोत यूरोप, मध्य एशिया, ईरान, अफ़गानिस्तान, भारत व दक्षिण पूर्वी एशिया की विभिन्न भाषाओं व बोलियों में इस्तेमाल गिनती के शब्द हमारे पूर्वजों के किसी एक विशेष वर्ग की देन है. यह वर्ग किसी एक देश से जिस किसी…

चोला की कमीज़ और कुरता

आनंद गहलोत  संस्कृत साहित्य में उत्तरीय का उल्लेख है, कमर में पहना जानेवाला वत्र, अधोवत्र या अंतरीय का उल्लेख है और उल्लेख है चोल(चोलः) का.  संस्कृत अमर कोष में (चोलः) शब्द है, लेकिन ‘चोला’ या ‘चोली’ नहीं. इस पुल्लिंग शब्द…

वर्ष, साल, यीअर, संवत्

आनंद गहलोत राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में सर्वाधिक प्रचलित सन (सन्) 2013- नववर्ष- की असंख्य, अनंत शुभकामनाएं. समय का प्रवाह अनंत है. विश्व के अनेक समुदायों में अलग-अलग दिन नववर्ष मनाया जाता है. भारत में विक्रमादित्य द्वारा शुरू की गयी…

न कोई कर्म ऊंचा है, न नीचा

कुलपति के. एम. मुनशी

गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं, “क्या कर्म है और क्या अकर्म, इस विषय में बुद्घिमानों की बुद्घि भी चकरा जाती है. बहुत से लोगों ने इस कठिनाई में कर्म-संन्यास की शरण ली है. संसार से दूर हट जाने में, गुफाओं…