अध्यक्षीय (जनवरी 2016)

 

…जीवन-उत्कर्ष नव

वर्ष नव, हर्ष नव, जीवन-उत्कर्ष नव… मधुशाला के अमर गायक श्री हरिवंशराय बच्चन ने इन शब्दों के साथ नववर्ष का स्वागत किया था. वस्तुतः हर नया वर्ष ‘बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेह’ का संदेश लेकर आता है. हर नये वर्ष के साथ नये लक्ष्यों, नये उत्कर्षों को पाने की नयी आशाएं जगती हैं, नयी सम्भावनाओं के द्वार खुलते हैं. सुखद सम्भावनाओं की यही दस्तक जीवन में एक नयी उमंग भर जाती है. आइये, इन उमंगों के साथ नववर्ष का स्वागत करें.

जीवन में बहुत कुछ होता है, जिसे स्मृतियों में संजोकर रखना अच्छा लगता है और बहुत कुछ ऐसा भी होता है, जिसे भुलाकर एक नया प्रारम्भ करना श्रेयस्कर होता है. जो कुछ, जितना भी अच्छा हुआ है, उसे धरोहर की तरह अपने साथ रखना और कुछ ऐसा हुआ है जिसके साथ कुछ अप्रिय जुड़ा है, उसे एक चेतावनी की तरह उपयोग में लेकर ही आगे के जीवन-पथ को प्रशस्त किया जा सकता है. पथ चुनना, प्रशस्त करना और नये लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए एक नयी ऊर्जा अपने भीतर जगाना यही हर नये वर्ष का संदेश होता है. यह नया वर्ष ‘भवन्स नवनीत’ के पाठकों के लिए मंगलमय हो, यही कामना है.

(अध्यक्ष, भारतीय विद्या भवन)

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