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दो कविताएं – नवनीत हिंदी http://www.navneethindi.com समय... साहित्य... संस्कृति... Thu, 30 Apr 2015 10:03:44 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 http://www.navneethindi.com/wp-content/uploads/2022/05/cropped-navneet-logo1-32x32.png दो कविताएं – नवनीत हिंदी http://www.navneethindi.com 32 32 नवम्बर 2008 http://www.navneethindi.com/?p=1439 http://www.navneethindi.com/?p=1439#respond Wed, 25 Feb 2015 11:20:10 +0000 http://www.navneethindi.com/?p=1439 Read more →

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Nov 08

शब्द-यात्रा

भाषा में आतंक
आनंद गहलोत

पहली सीढ़ी 

ओ सूरज!
स्वामी संवित् सोमगिरि

आवरण-कथा

कब अपने कहलायेंगे अपनी बस्ती के बच्चे
रमेश थानवी
मासूम बचपन पर कुपोषण की मार
भुवेंद्र त्यागी
बच्चों को छोटे हाथों से चांद -सितारे छूने दो
सरोज बाला चंदोला
बच्चे काम पर जा रहे हैं
विजय कुमार
ऐसे भी जीता है बचपन
एन. भानुतेज
बच्चों के बारे में कुछ बेतरतीब नोट्स
स्वयं प्रकाश
यह भी बचपन !
सुधा अरोड़ा

मेरी पहली कहानी

एक चुप्पी क्रॉस पर चढ़ी
प्रभु जोशी

आलेख

स्त्री की वैचारिक अभिव्यक्ति पर जड़े तालों का सत्य
चित्रा मुद्गल
नेहरू का अंतर्द्वंद्व
विश्वनाथ
जब-जब उनसे मिला… अनेरा ही पाया उन्हें
मार्तण्ड उपाध्याय
साहित्य साधना की सफलता-सार्थकता का अर्थ
कुसुमाग्रज
मध्य प्रदेश का राज्यपक्षी – दूधराज
डॉ. परशुराम शुक्ल
‘सुब्हे बनारस’ का एक मतलब यह भी
डॉ. प्रमोद कुमार सिंह
…ताकि प्रभु की स्तुति में हाथ उठा सकें
संत राजिंदर सिंह
बदलती वैश्विक सभ्यता की बिंदास अभिव्यक्ति का हस्ताक्षर
ज्यां मॅरी गुस्ताव ली क्लेजियो
डॉ. कृष्ण कुमार रत्तू

व्यंग्य

गुमशुदा
दीवान तलदार

किताबें

धारावाहिक-उपन्यास (भाग-6)

महात्मा विभीषण
सुधीर निगम 

अध्यक्ष का सम्बोधन

 धरोहर

ईदगाह (कहानी)
प्रेमचंद

कविताएं

दो कविताएं
यज्ञ शर्मा
बचपन मेरा वापस ला दो
कैलास पंडित
बच्चे हंस रहे हैं
वसंत आबाजी डहाके
बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता
राजेश जोशी

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मार्च 2014 http://www.navneethindi.com/?p=557 http://www.navneethindi.com/?p=557#respond Fri, 22 Aug 2014 11:25:53 +0000 http://www.navneethindi.com/?p=557 Read more →

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March 2014 Cover - 1-4 FNLजब हम कोई व्यंग्य पढ़ते हैं या सुनते हैं तो अनायास चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. हो सकता है इसीलिए व्यंग्य को हास्य से जोड़ दिया गया हो, और इसीलिए यह मान लिया गया हो कि व्यंग्य हास्य का मुखौटा लगाकर ही प्रकट हो. लेकिन यह आवश्यक नहीं है कि व्यंग्य हास्य की उत्पत्ति करे ही. छोटे से केले के छिलके पर किसी मोटे व्यक्ति को फिसलता देखकर हंसी आना भले ही अशिष्टता हो, पर हंसी आ जाती है. इस हंसी के साथ व्यंग्य कहीं नहीं जुड़ा. लेकिन जब छोटे और बड़े के इस रिश्ते को फिसलन के उस दर्पण में देखा जाता है, जो किसी ने यह दिखाने के लिए सामने रखा है कि ‘बड़े’ की गर्वोक्ति वस्तुतः कितनी छोटी है, तब स्थिति भी बदल जाती है और उसका अर्थ भी. विसंगतियों को सामने लाने, उन्हें सही ‘ाoम’ में रखने और ऐसा करके किसी सुधार की ओर इशारा करने की प्रक्रिया की व्यंग्यकार की दृष्टि से स्थितियों को देखना कहा जा सकता है. यह देखकर भी चेहरे पर मुस्कान तो आ सकती है, पर भीतर मन में खुशी नहीं, एक पीड़ा जनमती है. हो वस्तुतः व्यंग्य विसंगतियों के खिलाफ़ एक संघर्ष है, पर इस संघर्ष की विशेषता यह है कि इससे कटुता नहीं जनमती, एक प्रकार की करुणा का भाव जगता है. इस करुणा में आक्रोश भी है और विकृतियों से उबरने की एक सात्विक कोशिश भी.

कुलपति उवाच

ईश्वर का अस्तित्व
के. एम. मुनशी

शब्द-यात्रा

‘आराम’ किस भाषा के नसीब में?
आनंद गहलोत

पहली सीढ़ी

जीवन का अधिकार, कर्तव्य
पाल इल्यार

आवरण-कथा

सम्पादकीय
इसलिए व्यंग्य…
ज्ञान चतुर्वेदी
मनुष्य के बौद्धिक विकास का शंखनाद
प्रेम जनमेजय
उज्ज्वल भोर की आंखों का अश्रुपूरित कोर
गौतम सान्याल
साहित्य में साहित्य का विरोध
यज्ञ शर्मा
ताकि लेखन साहित्य न बन जाये
शरद जोशी

धारावाहिक आत्मकथा

सीधी चढ़ान (चौदहवीं किस्त)
कनैयालाल माणिकलाल मुनशी

व्यंग्य

कुत्तागीरी
विष्ण नागर
जंगल में रब्बर शेर
जवाहर चौधरी
स्नोबाल की खुराफातें
जॉर्ज ऑरवेल
मुर्गियां
शंकर पुणतांबेकर
आंगन में बैंगन
हरिशंकर परसाई
कुछ वर्गवाद
कुट्टिचातन
स्वागत एक परम श्रद्धेय आदरणीय का
लक्ष्मेंद्र चोपड़ा
अहिंसा की आग
प्रदीप पंत
हम क्यों त्योहार विमुख हैं
गोपाल चतुर्वेदी

आलेख

हास्य का मनोविज्ञान
जगन्नाथ प्रसाद मिश्र
मेरे साहित्य की आदि-प्रेरणा
गोपाल प्रसाद व्यास
फागुन की धूप सरीखे धर्मवीर इलाहाबादी
पुष्पा भारती
दुनिया का खेला
अनुपम मिश्र
लड़ाई तो पितृसत्तात्मक संरचना से है,
सुधा अरोड़ा
अंधेरे से पार आती स्त्री
मधु कांकरिया
महाराष्ट्र का राज्यवृक्ष- आम
डॉ. परशुराम शुक्ल
सप्तपर्ण उर्फ़ छतिवन
नारायण दत्त
समंदर पर पुल बांधने का वक्त
देवेंद्र इस्सर
पावनता धर्म का सार है
जे. कृष्णमूर्ति
किताबें

कहानी

धुंध के पार
संतोष श्रीवास्तव
विनम्रता का परिणाम
रश्मि शील

कविता      

सम्पादकों के गीत
अज्ञेय
दो कविताएं
सुधा अरोड़ा
उत्सव बना गुलाल
दिनेश शुक्ल
फागुन
रांगेय राघव

समाचार

भवन समाचार
संस्कृति समाचार

      

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