अगस्त 2024

कुलपति उवाच

03   संकट संस्कृति का

     के.एम. मुनशी

अध्यक्षीय

04   हम जन्मे हैं, स्वतंत्र जीवन के लिए

     सुरेंद्रलाल जी. मेहता

पहली सीढ़ी

11   मैंने नहीं कल ने बुलाया है!

     हरीश भादानी

व्यंग्य

64   इंस्पेक्टर मातादीन के थाने में

     अशोक गौतम

शब्द-सम्पदा

118  एक कलश पाकिस्तान में

     अजित वडनेरकर

आवरण-कथा

12   गुलाम मानसिकता के बंधन

     सम्पादकीय

14   स्वाधीनता और समानता जुड़वां…. हैं

     प्रियदर्शन

19   स्वतंत्रता का वह स्वर्ग

     शिवदयाल

26   मानसिक क्रांति से ही सही आज़ादी

     दीपक पाचपोर

आलेख

31   क्या हम लोकतंत्र के पठार पर बैठे हैं?

     रामशरण जोशी

49   हिरोशिमा और रंगीन कागज के बगुले

     अशोक भौमिक

55   हां, यह लखनऊ है!

     के. पी. सक्सेना

60   गुजराती भाषा का विदेशी चाहक

     राजेंद्र निगम

67   …वहां वे भी पहुंचे मगर धीरे-धीरे

     प्रकाश मनु

80   वो सुबह हमीं से आयेगी…

     राजेंद्र गुप्ता

89   एक अभियान का नाम है गीता प्रेस

     विमल मिश्र

94   सियोल – विकास यात्रा का समर्थ पथिक

     नर्मदा प्रसाद उपाध्याय

101   दो गज़ ज़मीन भी न मिली…

     जितेंद्र भाटिया

116   हरीतिमा और मनुहार का माह 

     भगवती प्रसाद द्विवेदी

122   परिचित अपरिचय

124   मुझे विश्वास है आप कर सकेंगी

     शीला झुनझुनवाला

133   किताबें

136   `भवन’ एक उत्कृष्ट … केंद्र है

     – राष्ट्रपति मुर्मु

कथा

43   यादों की देहरी

     रंजना जायसवाल

84   मेरा विवाह

     कोडागिना गौरम्मा

104   चीलें

     कादर अब्दुल्ला

कविताएं

58   तीन कविताएं

     परषोतम कुमार

83   दो कविताएं

     ओमप्रकाश वाल्मीकि

93   दो ग़ज़लें

     संजीव प्रभाकर

समाचार

140   भवन समाचार

144   संस्कृति समाचार

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