कुलपति उवाच
03 संकट संस्कृति का
के.एम. मुनशी
अध्यक्षीय
04 हम जन्मे हैं, स्वतंत्र जीवन के लिए
सुरेंद्रलाल जी. मेहता
पहली सीढ़ी
11 मैंने नहीं कल ने बुलाया है!
हरीश भादानी
व्यंग्य
64 इंस्पेक्टर मातादीन के थाने में
अशोक गौतम
शब्द-सम्पदा
118 एक कलश पाकिस्तान में
अजित वडनेरकर
आवरण-कथा
12 गुलाम मानसिकता के बंधन
सम्पादकीय
14 स्वाधीनता और समानता जुड़वां…. हैं
प्रियदर्शन
19 स्वतंत्रता का वह स्वर्ग
शिवदयाल
26 मानसिक क्रांति से ही सही आज़ादी
दीपक पाचपोर
आलेख
31 क्या हम लोकतंत्र के पठार पर बैठे हैं?
रामशरण जोशी
49 हिरोशिमा और रंगीन कागज के बगुले
अशोक भौमिक
55 हां, यह लखनऊ है!
के. पी. सक्सेना
60 गुजराती भाषा का विदेशी चाहक
राजेंद्र निगम
67 …वहां वे भी पहुंचे मगर धीरे-धीरे
प्रकाश मनु
80 वो सुबह हमीं से आयेगी…
राजेंद्र गुप्ता
89 एक अभियान का नाम है गीता प्रेस
विमल मिश्र
94 सियोल – विकास यात्रा का समर्थ पथिक
नर्मदा प्रसाद उपाध्याय
101 दो गज़ ज़मीन भी न मिली…
जितेंद्र भाटिया
116 हरीतिमा और मनुहार का माह
भगवती प्रसाद द्विवेदी
122 परिचित अपरिचय
124 मुझे विश्वास है आप कर सकेंगी
शीला झुनझुनवाला
133 किताबें
136 `भवन’ एक उत्कृष्ट … केंद्र है
– राष्ट्रपति मुर्मु
कथा
43 यादों की देहरी
रंजना जायसवाल
84 मेरा विवाह
कोडागिना गौरम्मा
104 चीलें
कादर अब्दुल्ला
कविताएं
58 तीन कविताएं
परषोतम कुमार
83 दो कविताएं
ओमप्रकाश वाल्मीकि
93 दो ग़ज़लें
संजीव प्रभाकर
समाचार
140 भवन समाचार
144 संस्कृति समाचार
