कुलपति उवाच
03 व्यावहारिक दर्शन
के.एम. मुनशी
अध्यक्षीय
04 मात्र तड़प से ही लक्ष्य नहीं मिलता
सुरेंद्रलाल जी. मेहता
पहली सीढ़ी
11 बरसो संस्कृति के सावन
सुमित्रानंदन पंत
व्यंग्य
95 बाथरूम का पाव्यूह…!
प्रकाश पुरोहित
शब्द-सम्पदा
126 संस्कीरत भाखते पोंगा पंडित
अजित वडनेरकर
आवरण-कथा
12 मनुर्भव
सम्पादकीय
14 …तो आपका मनुष्य होना अभी बाकी है
पंकज सुबीर
21 आदमी का इन्सां होना
ध्रुव शुक्ल
25 मनुष्य जाति के अस्तित्व पर संकट
मधुसूदन आनंद
28 मनुष्यो, पूर्ण मनुष्य बनो
शम्भूसिंह कौशिक
31 मनुष्यत्व
रवींद्रनाथ ठाकुर
आलेख
38 महाभारत की पीड़ा
विद्यानिवास मिश्र
61 हमें आलोक चाहिए!
हेमंत शेष
64 गणित का नोबेल पुरस्कार
मनीष श्रीवास्तव
66 कोरिया का लहलहाता वृक्ष
नर्मदा प्रसाद उपाध्याय
76 …अर्थात दादा धर्माधिकारी
देवदत्त माधव धर्माधिकारी
81 चौंकाती नहीं, डराती है यह `ऑनलाइन फ्रॉड’ की आंधी
लोकमित्र गौतम
100 बेहतर दुनिया बनाने का सपना
अंगद सिंह पड्डा
103 उसकी कविताओं की दस्तक…
संतोष श्रीवास्तव
109 अपने आपसे जुदा एक नाम जोर्जे लुई बोर्खेज़!
जितेंद्र भाटिया
123 कला की दुनिया में भटकता `पूर्ण पुरुष’
मधुबाला शुक्ला
130 एक परिवार के बहाने देश की व्यथा- कथा
विष्णु नागर
133 वो एक शानदार इंसान
शैहला हाशमी ग्रेवाल
137 किताबें
कथा
53 भूलने में सुख मिले तो भूल जाना
प्रगति गुप्ता
69 परछाइयां
सविता मनचंदा
86 अंतर
राजा सिंह
115 वह दूसरा
जोर्जे लुई बोर्खेज़
कविताएं
36 वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे
मैथिलीशरण गुप्त
74 वंशी माहेश्वरी की कविताएं
94 दो कविताएं
कौशिक महेता
98 पटरी पर बिखरा हुआ प्यार
गरिमा संजय दुबे
समाचार
140 भवन समाचार
144 संस्कृति समाचार
