जुलाई 2023

कुलपति उवाच 

03   व्यावहारिक दर्शन

      के.एम. मुनशी

अध्यक्षीय

04   मात्र तड़प से ही लक्ष्य नहीं मिलता

     सुरेंद्रलाल जी. मेहता

पहली सीढ़ी

11   बरसो संस्कृति के सावन

     सुमित्रानंदन पंत

व्यंग्य

95   बाथरूम का पाव्यूह…! 

     प्रकाश पुरोहित

शब्द-सम्पदा

126  संस्कीरत भाखते पोंगा पंडित 

     अजित वडनेरकर

आवरण-कथा

12   मनुर्भव

     सम्पादकीय

14   …तो आपका मनुष्य होना अभी बाकी है

     पंकज सुबीर

21   आदमी का इन्सां होना 

     ध्रुव शुक्ल

25   मनुष्य जाति के अस्तित्व पर संकट

     मधुसूदन आनंद

28   मनुष्यो, पूर्ण मनुष्य बनो

     शम्भूसिंह कौशिक

31   मनुष्यत्व

     रवींद्रनाथ ठाकुर

आलेख 

38   महाभारत की पीड़ा

     विद्यानिवास मिश्र

61   हमें आलोक चाहिए!

     हेमंत शेष

64   गणित का नोबेल पुरस्कार 

     मनीष श्रीवास्तव

66   कोरिया का लहलहाता वृक्ष

     नर्मदा प्रसाद उपाध्याय

76   …अर्थात दादा धर्माधिकारी

     देवदत्त माधव धर्माधिकारी

81   चौंकाती नहीं, डराती है यह `ऑनलाइन फ्रॉड’ की आंधी 

     लोकमित्र गौतम

100  बेहतर दुनिया बनाने का सपना

     अंगद सिंह पड्डा

103  उसकी कविताओं की दस्तक…

     संतोष श्रीवास्तव 

109  अपने आपसे जुदा एक नाम जोर्जे लुई बोर्खेज़!

     जितेंद्र भाटिया

123  कला की दुनिया में भटकता `पूर्ण पुरुष’

     मधुबाला शुक्ला

130  एक परिवार के बहाने देश की व्यथा- कथा 

     विष्णु नागर

133  वो एक शानदार इंसान

     शैहला हाशमी ग्रेवाल

137  किताबें

कथा

53   भूलने में सुख मिले तो भूल जाना 

     प्रगति गुप्ता

69   परछाइयां

     सविता मनचंदा

86   अंतर

     राजा सिंह

115  वह दूसरा

     जोर्जे लुई बोर्खेज़

कविताएं

36   वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे

     मैथिलीशरण गुप्त

74   वंशी माहेश्वरी की कविताएं

94   दो कविताएं

     कौशिक महेता 

98   पटरी पर बिखरा हुआ प्यार

     गरिमा संजय दुबे  

समाचार

140  भवन समाचार

144  संस्कृति समाचार

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