कुलपति उवाच
03 दरारें जोड़ने के लिए
के.एम. मुनशी
अध्यक्षीय
04 कैसे स्वस्थ रहेगा हमारा शरीर और दिमाग?
सुरेंद्रलाल जी. मेहता
पहली सीढ़ी
11 सपने
गैब्रियल गार्सिया मार्केज़
व्यंग्य
66 एक मोहिनी मुस्कान और तीन समाधान
हरीश नवल
धारावाहिक उपन्यास (भाग – 3)
121 हिन्देन्दु
श्याम बिहारी श्यामल
शब्द-सम्पदा
134 फोकट के फुग्गे में फूंक भरना
अजित वडनेरकर
आवरण-कथा
12 कसम संविधान की
सम्पादकीय
14 संविधान और हम
शिवेंद्र राणा
19 संविधान के नाम…. कसम खायी है
प्रियदर्शन
23 संविधान बचाना अपनी रक्षा करना है
दीपक पाचपोर
28 श्री राम, शबरी और संविधान
अज़हर हाशमी
30 भारतीय न्यायतंत्र की पुनर्रचना
देवदत्त माधव धर्माधिकारी
34 आम्बेडकर की चेतावनी
गणेश मंत्री
38 लोकतंत्र-शुद्धि की प्रक्रिया
आचार्य तुलसी
आलेख
42 `यथास्थितिवाद’ से मुक्ति की तलाश में
रामशरण जोशी
54 ज्ञानपीठ यों ही नहीं मिलता
विनोद खेतान
60 आज मुझे कुछ कहना है
एम.टी. वासुदेवन नायर
63 रेणु और लतिका : रोगी और नर्स की प्रेमकथा
अश्विनी कुमार आलोक
72 अमीन सयानी होने का मतलब
दिनेश लखनपाल
84 पारिजात के फूल
हरिशंकर राढ़ी
90 बेसुरा पालिटिकल आर्केस्ट्रा और हम
ध्रुव शुक्ल
92 …तो व्यंग्य न लिखें
विष्णु नागर
102 धुले आसमान की धुंध
हरिसुमन बिष्ट
112 मैं वो झेलम नहीं हूं…
रेखा देशपांडे
117 कविता का किसान
यश मालवीय
137 किताबें
कथा
46 नेपालवाली
सतीश नूतन
96 संग्राम सिंह
मालती निमखेडकर
कविताएं
58 दो ग़ज़लें
राकेश शर्मा
71 रमज़ान का महीना
यश मालवीय
82 पीछे छूटते परिवार
फूलचंद मानव
91 पिता की पीठ
सुदर्शन वशिष्ठ
120 कैसे कैसे लोग
कैलाश गौतम
समाचार
140 भवन समाचार
144 संस्कृति समाचार
