कुलपति उवाच
03 `सब भारत में, भारत में सब’
के.एम. मुनशी
अध्यक्षीय
04 कुछ भी सम्भव है
सुरेंद्रलाल जी. मेहता
पहली सीढ़ी
11 लीक पर वे चलें…
सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
व्यंग्य
102 शादी के मौसम में भूषण के छंद
अरुणेंद्र नाथ वर्मा
शब्द-सम्पदा
134 कंगाल की ठठरी, ग़रीब का पिंजर
अजित वडनेरकर
आवरण-कथा
12 गांधी आज होते तो…
सम्पादकीय
14 गांधी : प्रासंगिकता का सवाल
नंदकिशोर आचार्य
24 राजनीति की मौलिक कल्पना करो
अपूर्वानंद
28 फिर चाहिए बापू
राजेश बादल
36 अंधेरे दौर में नैतिक मूल्यों की रोशनी
प्रताप भानु मेहता
46 नफरत के खिलाफ
नंदितेश निलय
49 मनुष्यता थी गांधी की जाति
रामचंद्र गुहा
52 गांधीगीरी
धर्मपाल अकेला
आलेख
57 …हम आगे नहीं बढ़ पायेंगे
आचार्य नरेंद्र देव
61 `मैं डरता नहीं हूं’
गणेश नारायणदास देवी
77 विजयादशमी पर एक पत्र
विद्यानिवास मिश्र
82 काफ़्का के शहर में
विनोद खेतान
88 हमने अपने पिता का नंगापन नहीं देखा – परसाई
97 ट्रिनीडाड में रामलीला
सुरेश ऋतुपर्ण
117 युद्ध से आगे और युद्ध के बाद
जितेंद्र भाटिया
137 किताबें
कथा
70 गूगल मीट
संजय कुमार सिंह
106 आदेश
भगवान अटलानी
121 चौराहे पर खड़ा सिपाही
न्यूयेन मांग तुआन
कविताएं
76 झूठा-सच
राम जैसवाल
96 सपने में एक मृत बच्चे से बातचीत
राजेश जोशी
114 हूबनाथ की कविताएं
समाचार
140 भवन समाचार
144 संस्कृति समाचार
