कुलपति उवाच
03 सांस्कृतिक संकट का निदान
के.एम. मुनशी
अध्यक्षीय
04 उत्तरदायित्व प्रेरित करता है
सुरेंद्रलाल जी. मेहता
पहली सीढ़ी
11 एक कदम काफी है
कार्डिनल न्यूमैन
व्यंग्य
82 मच्छर की महत्ता
गोपाल चतुर्वेदी
शब्द-सम्पदा
118 फिरकों की अ़फरा-त़फरी, कयामत आने को है
अजित वडनेरकर
आवरण-कथा
12 बदला-बदला सा गांव
सम्पादकीय
14 नयी सामाजिकता का उदय
सतेंद्र कुमार
24 कृषि-संस्कृति की समाधि
अमरनाथ शर्मा
32 मेरे गांव की बदलती दुनिया
सत्यदेव त्रिपाठी
38 स्मृतियों में अटका मेरा गांव
हरिवंश
51 स्वतंत्र भारत का जिंती गांव
रुचि भल्ला
57 पुकारती है वसुंधरा
अवधेश तिवारी
आलेख
68 अर्थों के विलोप का समय और भारतीयता की अवधारणा
विजय कुमार
87 सही माने में भारतीय कलाकार
अशोक भौमिक
100 `लातिन के आख़िरी पुष्प कुंज’ की अंतर्राष्ट्रीय महक
जितेंद्र भाटिया
112 द्विवेदी जी की शर्त
राजेंद्र परदेसी
116 गंगा मैया से कहियो सरस्वती ने भेजो है…
संध्या रियाज़
121 अजंता की गुफाओं में पली प्रेम कथा
संतोष श्रीवास्तव
123 रॉबर्ट गिल की पारो
प्रमिला वर्मा
137 किताबें
कथा
75 जिल्दसाज़
ज्ञानप्रकाश विवेक
96 जामुन का वही पेड़
सुधा गोयल
105 नदी का तीसरा किनारा
जोआओ ग्विमारेज़ रोसा
कविताएं
62 गांव की चिट्ठी शहर के नाम
ओम नागर
94 दो कविताएं
राजकुमार कुम्भज
114 पिता
संतोष कुमार झा
समाचार
140 भवन समाचार
144 संस्कृति समाचार
