दिसम्बर 2023

कुलपति उवाच 

03    दैवीय पूर्णता तक

      के.एम. मुनशी

अध्यक्षीय

04    हम सब में है रचनात्मकता

      सुरेंद्रलाल जी. मेहता

पहली सीढ़ी

11    किंतु मैं लड़ूंगा ही

      श्रीनरेश मेहता

व्यंग्य

83    दो गिद्धों की वार्ता

      शशिकांत सिंह `शशि

शब्द-सम्पदा

134   ज़रूर कोई ‘कांड’ हुआ है 

      अजित वडनेरकर

आवरण-कथा

12    कैसा समय, कैसी सभ्यता!

      सम्पादकीय

14    आधुनिकता का मूलभाव संवेदना है 

      दीपक पाचपोर 

19    यह घृणा विरूपता और …चरम दौर है

      अच्युतानंद मिश्र

23    कुंद होती संवेदना को धार देनी है

      मीनाक्षी जोशी

26    आत्मीयता की दरकती धरती और संवेदना का सिकुड़ता आकाश

      प्रेमरंजन अनिमेष

आलेख 

32    सब सबके लिए जिएं 

      दादा धर्माधिकारी

35    मेग्नाकार्टा यानी महाधिकार पत्र

      सुधीर निगम

40    पाप के चार हथियार

      कन्हैयालाल मिश्र `प्रभाकर

50    तारीखी कारनामों वाली इस्मत आपा

      निदा फाज़ली

54    लोकप्रियता की कहानी : शिवानी

      विनोद दास

62    टूटे हुए सपनों की राख से उगा एक धड़कता शहर

      जयश्री पुरवार

69    रिल्के के पत्र पत्नी क्लैरा के नाम

75    संविधान की `सजावट’ का मतलब

      कुमार कृष्णन

80    अब सब बदल गया है!

      चंचल

98    नदी 6400 कि.मी. लम्बी, और एक पुल नहीं!

      राजेंद्र निगम

104   `पत्थरों में प्राण फूंकने का …जानते हैं वे’ 

      निर्मला डोसी

109   मेरी पहली कविता  

      सुमित्रानंदन पंत

120   कुमाऊं पर्वतों पर घोड़ा लाइब्रेरी! 

      के. पाम राव

123   फीनिक्स पक्षी सी कालजयी धरती-वियतनाम! 

      जितेंद्र भाटिया

137   किताबें

कथा

43    बस एक शर्त

      मीरा उगरा

86    राजीनामा

      गुरचरण चाहल भीखी

115   जोखिम

      संतोष श्रीवास्तव

126   सफेद कबूतर

      न्यूगेन क्वांग थांग

कविताएं

60    अकेला आदमी

      राजेंद्र निशेश

102   दरका हुआ दर्पण

      मालती जोशी

समाचार

140   भवन समाचार

144   संस्कृति समाचार

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