अगस्त  2016 

कुलपति उवाच 

मेरा सत्य 

के.एम. मुनशी 

अध्यक्षीय 

अंतिम सत्य

सुरेंद्रलाल जी. मेहता 

पहली सीढ़ी 

हे पवित्र, हे अनिंद्य 

रवींद्रनाथ ठाकुर 

आवरण–कथा 

हस्तक्षेप के पक्ष में 

सम्पादकीय 

हस्तक्षेप की परम्परा 

हरिवंश 

किनारे खड़े होकर तमाशा देखने के दिन गये 

चंद्रभूषण 

हस्तक्षेप, आलोचना और छींटाकशी के बीच लोकतंत्र 

प्रियदर्शन 

इसलिए हस्तक्षेप कि… 

गंगा प्रसाद विमल 

लेखक को फिर से जीने दो 

लोकतंत्र के नाम पर, आइए…

नोबेल कथा 

एमेली के लिए एक गुलाब 

विलियम फॉकनर 

व्यंग्य 

सरकारी तख्ता 

अजीज नेसिन 

अगस्त–अनुभूति 

शरद जोशी

धारावाहिक उपन्यास – 7 

शरणम् 

नरेंद्र कोहली 

शब्द–सम्पदा 

शस्यश्यामलां मातरम् 

विद्यानिवास मिश्र 

आलेख 

पिताजी, इतने सारे कर्ज़ कैसे चुकाऊंगी? 

सेलमा लेगरलॉफ 

देशीवाद और आधुनिकता 

भालचंद्र नेमाड़े 

संविधान सभा में सेक्यूलरिज़्म 

सव्यसाची भट्टाचार्य 

पश्चिम बंगाल की राजकीय मछली – हिल्सा 

परशुराम शुक्ल 

तर्क की क्रांति 

अमृता प्रीतम 

हिंदी पत्रकारिता का कीर्तिस्तम्भ 

विजयदत्त श्रीधर 

फराक के ‘स्कूल’ में 

रमेश चंद्र द्विवेदी 

शब्द–शब्द झरते अर्थ 

डॉ. श्रीराम परिहार 

आत्मा की भाषा सीखें 

डॉ. नरेश 

किताबें 

कथा 

चकल्लस 

डॉ. नताशा अरोड़ा 

सपने कहां खो गये 

डॉ. अलका चौबे 

कविताएं 

तीन कविताएं 

बलदेव वंशी 

अक्सर 

सुशांत सुप्रिय 

दो गज़लें 

हस्तीमल हस्ती 

समाचार 

भवन समाचार 

संस्कृति समाचार

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