Category: पिछले अंक

मई 2016

राष्ट्रवाद को लेकर दुनिया भर में चर्चाएं होती रही हैं. इसकी आवश्यकता और इसके खतरों को लेकर विद्वानों में इतिहास जितनी पुरानी बहस चलती रही है. इसी राष्ट्रवाद के चलते दुनिया ने दो विश्वयुद्धों की विभीषिका झेली है और इसी…

अप्रैल  2016

कुलपति उवाच कर्मयोग का संदेश के.एम. मुनशी अध्यक्षीय राजाजी और मुनशी सुरेंद्रलाल जी. मेहता पहली सीढ़ी मुक्ति की आकांक्षा सर्वेश्वर दयाल सक्सेना आवरण-कथा इतने पास… पर कितने दूर सम्पादकीय उड़ान भरती आकांक्षाओं का सच रामशरण जोशी व्यवस्था के गटर में…

दिसंबर, 2005

  विदाई निर्मल वर्मा – चीड़ों से उतरती चांदनी अमृता प्रीतम – निःशब्द होते शब्द के.आर. नारायणन – हमारा राष्ट्रपति अलविदा 2005 फिर लौटकर मत आना ! अमरीकी नागरिको !   नोएम चॉम्स्की नदी के द्वीप अज्ञेय वह दिन   “हैलो,…

नवंबर 2005

      इतिहास क्या है दारूल उलूम कथा-संसार अरविंद गुर्टू, क्षमा चतुर्वेदी व्यंग्य डॉ. औंकारनाथ चतुर्वेदी कसौटी इस सत्य की खोज कौन करेगा ? प्रभाष जोशी मैदान से हवा में एक सनसनी का नाम है – सानिया मिर्जा कुमार खास…

अक्तूबर 2005

प्रिय पाठक चिंतन बस इतना ही !              पन्ने                      धुंधली पड़ती रेखाएं           अशोक वाजपेयी अनुचिंतन लाल साड़ी सुधा मूर्ति शख्सियत शाहरुख खान – जिंदगी तुझसे बहुत प्यार किया है मैंने      काव्य-संसार आलोक श्रीवास्तव विनोद शाही अवधकिशोर सक्सेना कथा-संसार सुशांत सुप्रिय उमेशचंद्र…