Category: पिछले अंक

अगस्त 2013

गांधीजी के साये में पनपने वाले देश के नेतृत्त्व में तीन नाम बड़ी प्रमुखता से लिए जाते हैं- पहला नाम जवाहरलाल नेहरू का है, जिन्हें गांधीजी ने अपना वारिस घोषित किया था; दूसरा वल्लभभाई पटेल का है जिन्होंने स्वतंत्र भारत…

जून 2013

‘रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून’ कहकर रहीम ने पानी के न जाने कितने-कितने अर्थ हमारे सामने उजागर कर दिये. प्यास बुझाने से लेकर इगज्जत बचाने तक की बातें कहता यह दोहा उस पानी की भी कहानी है जो…

जुलाई 2013

साहित्य क्यों में ही साहित्य क्या है, का उत्तर छिपा है. इस उत्तर को तलाशने की आवश्यकता इसलिए है कि हम अपने रचने की आवश्यकता को समझ सकें. किसी भी रचनाकार से, विशेषकर कवियों से, जब यह पूछा जाता है…

मई 2013

  कुलपति उवाच ब्राह्मण कौन है? के. एम. मुनशी शब्द-यात्रा विचरण करते पशु-पक्षी (भाग-2) आनंद गहलोत पहली सीढ़ी महानता का रहस्य म्यूरिएल मेंद आवरण-कथा सम्पादकीय ‘नहि मानुषात् श्रेष्ठतरं हि किंचित्’ अच्युतानंद मिश्र त्रासदी धर्म को न समझने की कैलाशचंद्र पंत…

अप्रैल 2013

मात्र 39 वर्ष की छोटी-सी आयु में स्वामीजी विश्व को जो दृष्टि दे गये वह मनुष्य को समझने-समझाने की दृष्टि थी. धर्म की उनकी व्याख्या में जहां एक ओर मनुष्यता के नये शिखरों को छूने की बात थी, वहीं धर्म…