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सच्चा साहित्यकार विजय कुमार तमन्ना थी कि समुंदर किनारे की रेत में पड़ी रहूं… ज्योत्सना मिलन चीज़ों को वहां से देखो जहां तुम्हारे पांव हों काशीनाथ सिंह जम्मू-कश्मीर का राज्यवृक्ष ः चिनार डॉ. परशुराम – नवनीत हिंदी https://www.navneethindi.com समय... साहित्य... संस्कृति... Fri, 23 Sep 2016 11:35:23 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://www.navneethindi.com/wp-content/uploads/2022/05/cropped-navneet-logo1-32x32.png सच्चा साहित्यकार विजय कुमार तमन्ना थी कि समुंदर किनारे की रेत में पड़ी रहूं… ज्योत्सना मिलन चीज़ों को वहां से देखो जहां तुम्हारे पांव हों काशीनाथ सिंह जम्मू-कश्मीर का राज्यवृक्ष ः चिनार डॉ. परशुराम – नवनीत हिंदी https://www.navneethindi.com 32 32 जुलाई 2014 https://www.navneethindi.com/?p=574 Sat, 23 Aug 2014 06:07:07 +0000 http://www.navneethindi.com/?p=574 Read more →

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Cover - 1-4 FNLविश्व-युद्ध के शताब्दी वर्ष में युद्ध के बारे में चिंतन का अभिप्राय मनुष्य के भीतर की उस पशुता को पराजित करने के बारे में जागरूक होने का प्रयास करना है, जो युद्धों का कारण बनती है. दुनिया दो विश्व-युद्ध झेल चुकी है. महान वैज्ञानिक आंइस्टीन ने कहा था, ‘मैं यह तो नहीं जानता तीसरा युद्ध किस हथियार से लड़ा जायेगा, लेकिन चौथे विश्व-युद्ध में पत्थर ही हथियार बनेंगे.’ अर्थात ये युद्ध मनुष्य को पशुता के उस काल में पहुंचा देंगे, जहां से मनुष्य बनने की प्रक्रिया शुरू हुई थी. प्रस्तर-युग से शुरू हुई यह प्रक्रिया निरंतर जारी है. लेकिन, दुर्भाग्य यह है कि मनुष्य के भीतर की पशुता जब-तब उस पर हावी हो जाती है. आवश्यकता इस पशुता के खिल़ाफ एक अभियान चलाने की हैö मनुष्य बनने का अभियान. यह अभियान हममें से हर एक के भीतर भी निरंतर चलते रहना चाहिए. इस प्रक्रिया का अर्थ है करुणा, संवेदनशीलता, क्षमा, सौहार्द्र और स्नेह के एक झरने का निरंतर बहते रहना, जो मनुष्य को मनुष्य से जोड़े. युद्ध की प्रवृत्ति को नकारने का यही अर्थ हो सकता है.

 

कुलपति उवाच

सर्जनशील शक्ति
के.एम. मुनशी

शब्द यात्रा

पुत्री बनी राजकुमारी
आनंद गहलोत

पहली सीढ़ी

स्टिल लाइफ
अमृता प्रीतम

आवरण-कथा

सम्पादकीय
युद्ध और शांति की सहयात्रा
रमेश नैयर
तब युद्ध नहीं होंगे
गंगा प्रसाद विमल
युद्ध शांति नहीं लाता
गिरिराज किशोर
महाभारत : युद्ध से मुक्ति की कथा
प्रभाकर श्रोत्रिय
युद्ध नहीं, बुद्ध चाहिए
मधु कांकरिया
एक लड़ाई यह भी
संजय द्विवेदी
एटम बनाम गांधी
रघु ठाकुर
युद्ध-साहित्य एक त्रासदी और
अवसर का परिणाम है
यह एक विशुद्ध बुराई है
महात्मा गांधी

धारावाहिक आत्मकथा

सीधी चढ़ान (अठारहवीं किस्त)
कनैयालाल माणिकलाल मुनशी

व्यंग्य

जहां इन्सान होगा, वहां लड़ाई होगी
यज्ञ शर्मा
प्रेमचंद के फटे जूते
हरिशंकर परसाई

आलेख

ईमानदार पत्रकारिता का पर्याय थे
नारायणदत्त जी
सुदर्शना द्विवेदी
एक सीधा, सरल, सच्चा साहित्यकार
विजय कुमार
तमन्ना थी कि समुंदर किनारे की
रेत में पड़ी रहूं…
ज्योत्सना मिलन
चीज़ों को वहां से देखो
जहां तुम्हारे पांव हों
काशीनाथ सिंह
जम्मू-कश्मीर का राज्यवृक्ष ः चिनार
डॉ. परशुराम शुक्ल
मेरी पहली रचना
प्रेमचंद
युगों की यात्रा करवाने वाला
वह एक पल
डॉ. उषा मंत्री
यह रहस्य जानेउ कोउ कोऊ
सुखदेव दुबे
अपना हाथ, जगन्नाथ
सुधीर निगम
किताबें

कहानियां

भाभी
जगदंबा प्रसाद दीक्षित
एक झूठी कहानी
रतन सिंह
भारतीय युद्धबंदी और इटली का वह गांव

कविताएं

आक्रामक हवाई…    
ऑटों द सोला
सूर्योदय का…
एंजोलिनो सिकियानोस
युद्ध के समय…        
पाल इल्यार

समाचार

भवन समाचार
संस्कृति समाचार
 

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