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प्रार्थना – नवनीत हिंदी https://www.navneethindi.com समय... साहित्य... संस्कृति... Tue, 24 Feb 2015 09:15:25 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://www.navneethindi.com/wp-content/uploads/2022/05/cropped-navneet-logo1-32x32.png प्रार्थना – नवनीत हिंदी https://www.navneethindi.com 32 32 फरवरी  2010 https://www.navneethindi.com/?p=801 Mon, 22 Sep 2014 05:59:03 +0000 http://www.navneethindi.com/?p=801 Read more →

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शब्द-यात्रा

रंग में रंगा रंग
आनंद गहलोत

पहली सीढ़ी

सखि, बसंत आया
निराला

आवरण-कथा

सम्पादकीय
ताकि जीवन में बसंत आये
नर्मदा प्रसाद उपाध्याय
प्रकृति के अध्यात्म का उत्सव है बसंत
रमेश दवे
चैत चित्त, मन महुआ
नीरजा माधव
बखौफ होकर घूमें बहारें
पद्मा सचदेव

मेरी पहली कहानी

टुकड़े-टिकड़े ज़िंदगी
हरीश पाठक

आलेख

अपसंस्कृति का संकट
कृष्ण कुमार
एक पेड़ का मोल
कौस्तुभ आनंद पंत
काश! गांधी पाकिस्तान जा पाते
विश्वनाथ प्रसाद टंडन
हरियाणा का राज्यपक्षी – काला तीतर
डॉ. परशुराम शुक्ल
आखिर हंसी क्यों आती है?
बेढब बनारसी
प्रार्थना के सौ वर्ष
श्याम नारायण श्रीवास्तव
नैतिकता का आधार
आचार्य महाप्रज्ञ
प्रथम आधुनिक विज्ञान गल्प
शुकदेव प्रसाद
सच्चाई भरा एक संवाद
डॉ. रमेश जानी
किताबें

व्यंग्य

अब वह दबे पांव आता है
गोपाल चतुर्वेदी
बसंत अपना अपना
राजेंद्र निशेश
रामविलास का प्रतिशोध
नारायण गंगोपाध्याय
देयरफोर
शेरजंग जांगती
पत्नी के प्रिय जुमले
सुभाष काबरा

उपन्यास अंश

अनुकथा
सुधा

कहानी

द्रोही
छाया महाजन
शिगूफ़ा
वेद राही

कविताएं

बसंतागम
प्रभाकर माचवे
बसंत की अगवानी 
नागार्जुन
फागुन में सावन
शिवमंगलसिंह सुमन
बसंत की एक लहर
कुंवर नारायण
फूल रस के भरे
गिरिजाकुमार माथुर
बासंती रात
ठाकुर प्रसाद सिंह
फाग राग
जानकीवल्लभ शात्री
बसंत गीत
केदारनाथ सिंह
दिन फागुन के
डॉ. रामदरश मिश्र
टेसू-सा फागुन खिला
दिनेश शुक्ल

समाचार 

संस्कृति समाचार 
भवन समाचार
 

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अप्रैल 2014 https://www.navneethindi.com/?p=562 https://www.navneethindi.com/?p=562#respond Fri, 22 Aug 2014 11:44:00 +0000 http://www.navneethindi.com/?p=562 Read more →

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April 2014 Cover - 1-4 FNLछह अप्रैल 1930 को 241 मील की यात्रा करके गांधी अपने अनुयायियों के साथ गुजरात के समुद्र तट पर बसे दांडी पहुंचे थे. उस दिन गांधी ने वहां  ब्रिटिश सत्ता द्वारा थोपे गये नमक-कानून का उल्लंघन करके सत्याग्रह को एक नया आयाम दिया था. यह विदेशी शासन और अमानवीय कानूनों के खिल़ाफ एक अहिंसक लड़ाई थी. उस दिन राष्ट्र ने सत्याग्रह की ताकत को समझा था और उसके महत्त्व को भी. फिर तो सारी दुनिया ने देखा कि किस तरह सत्याग्रह और अहिंसा भारत की आज़ादी की लड़ाई का हथियार बन गये. इसके साथ असहयोग को जोड़कर गांधी ने संघर्ष का एक नया व्याकरण रच दिया. लेकिन क्या जनतांत्रिक भारत में भी यह हथियार और यह व्याकरण उतने ही सार्थक हैं, जितने एक विदेशी सत्ता को समाप्त करते समय थे? डॉ. भीमराव आम्बेडकर ने संविधान सभा के अपने आखिरी भाषण में सत्याग्रह को अराजकता का व्याकरण बताते हुए जनतांत्रिक देश में इसके औचित्य पर प्रश्नचिह्न लगाया था. आज हम गांधी के इस हथियार का जिस तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, उसे देखते हुए क्या ऐसा नहीं लगता कि आम्बेडकर सही कह रहे थे?

कुलपति उवाच

अर्थप्रिय समाज की त्रासदी
के. एम. मुनशी

शब्द यात्रा

स्वाहा, अपना प्राचीन अर्थ खो बैठा
आनंद गहलोत

पहली सीढ़ी

प्रार्थना
सुखदेव दुबे

आवरण-कथा

सम्पादकीय
असहयोग, सत्याग्रह और जनतंत्र
न्यायमूर्ति चंद्रशेखर धर्माधिकारी
लोकमानस में चलती नयी दांडी-यात्रा
रमेश नैयर
सत्याग्रह की प्रयोगशाला
रामचंद्र मिश्र
क्रांति चुटकी भर नमक से
सेमदोंग रिनपोचे
सत्याग्रह का दिव्य संदेश
महात्मा गांधी
अराजकता का व्याकरण
बी.आर. आम्बेडकर
कौन बचेगा यदि भारत मरता है?
जवाहरलाल नेहरू

धारावाहिक आत्मकथा

सीधी चढ़ान (पंद्रहवीं किस्त)
कनैयालाल माणिकलाल मुनशी

व्यंग्य

रिटर्न ऑफ नगीना बाबू
प्रियदर्शी खैरा

आलेख

भारतीय वाङ्मय और साप्रदायिकता
रमेश दवे
अमृत की कामना करना ही शिव है
लक्ष्मीकांत वर्मा
पुरखों का पाथेय
बलराम
मेघालय का राज्य वृक्ष – गंभार
डॉ. परशुराम शुक्ल
एक बेटे और पैंतीस हजार बेटियों की मां
निकोलस क्रिस्टोफ
हे श्वेतकेतु, वही तू है
इला कुमार
लुपिता को एक पत्र मिला था…
जागना है तो निद्रा त्यागें
डॉ. नरेश
एकलव्य का अंगूठा कटने के बाद
सुधीर निगम
विवादों के बवंडर का नोबेल विजेता ः गुंटर ग्रास
कपिल आर्य
किताबें

कहानियां

घटोत्कच
शशिकांत सिंह शशि
आवाज़ें
वंदना शुक्ल
संयम की परीक्षा (बोधकथा)
डॉ. रश्मि शील

कविताएं

दो कविताएं
नंद चतुर्वेदी
दो ग़ज़लें
निदा फाज़ली
शिलावन-वासी
ओम प्रभाकर

समाचार

भवन समाचार
संस्कृति समाचार

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