Deprecated: Optional parameter $depth declared before required parameter $output is implicitly treated as a required parameter in /home3/navneeth/public_html/wp-content/themes/magazine-basic/functions.php on line 566

Warning: Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home3/navneeth/public_html/wp-content/themes/magazine-basic/functions.php:566) in /home3/navneeth/public_html/wp-includes/feed-rss2.php on line 8
एडवर्ड एडेलसन – नवनीत हिंदी https://www.navneethindi.com समय... साहित्य... संस्कृति... Mon, 03 Nov 2014 08:02:17 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://www.navneethindi.com/wp-content/uploads/2022/05/cropped-navneet-logo1-32x32.png एडवर्ड एडेलसन – नवनीत हिंदी https://www.navneethindi.com 32 32 कौन कितना बुद्धिमान https://www.navneethindi.com/?p=1139 https://www.navneethindi.com/?p=1139#respond Mon, 03 Nov 2014 07:20:47 +0000 http://www.navneethindi.com/?p=1139 Read more →

]]>
♦  एडवर्ड एडेलसन     

     चिंपैंजी की बुद्धि-शक्ति पर वैज्ञानिकों को भी कभी संदेह नहीं रहा. जिन लोगों ने घर पर चिंपैंजी पाले हैं, उन्होंने देखा है कि जन्म के बाद दो-एक वर्षों में चिंपैंजी के बच्चे मानव-शिशुओं से अधिक तेजी से नयी बातें सीख जाते हैं. हां, जब मानव-शिशु बोलना सीख जाता है, वह चिंपैंजी से तेजी से आगे निकलने लगता है.

    परंतु वूल्फगैंग कोहलर, ने कई प्रयोगों द्वारा यह सिद्ध कर दिया कि चिंपैंजी कभी-कभी मनुष्य से अधिक बुद्धिमत्ता दिखा देता है. अगर एक केले को रस्सी से लटका दें और चिंपैजी के हाथ में डंडा दे दें, तो वह डंडे को टिकाकर उस पर चढ़कर केले को पकड़ने की कोशिश करेगा, जबकि मनुष्य डंडा मारकर केले को गिराने की कोशिश करेगा.

    साथ ही वैज्ञानिक यह भी नहीं भूलते कि अन्य नर-वानरों (प्राइमेट) की बुद्धि-शक्ति के सम्बंध में अभी बहुत कम जांच-पड़ताल हो पायी है, क्योंकि उनसे आसानी से काम नहीं कराया जा सकता.

    उदाहरण के लिए बबून को लीजिए, जो बहुत दुष्ट स्वभाव का जीव है, फिर भी इसकी बुद्धिमानी की कई कथाएं प्रचलित हैं. अफ्रीका के कुछ हिस्सों में तो यह भी माना जाता है कि बबून बोलते भी हैं. कहा जाता है कि एक बार बबून एक छोटे बच्चे को उठा ले गया और एक वृक्ष की सबसे ऊंची डाल पर बैठ गया. लोगों ने बच्चे को छुड़ाने की बहुत कोशिश की, मगर सफल नहीं हुए, अंत में एक बुशमन आया, उसने बबून से बात-चीत की, तब कहीं जाकर बच्चा वापस मिला.

    बुद्धिमत्ता में चिंम्पैंजी के विकट प्रतिद्वंद्वी सूंस (डाल्फिन) के मस्तिष्क का वजन मनुष्य के मस्तिष्क से अधिक होता है. उसकी बुद्धिमानी की कहानियां पिछले दो हजार वर्षों से कही जा रही हैं. प्राचीन रोम में एक किस्सा प्रचलित था. एक बार सूंस की दोस्ती एक बच्चे से हो गयी. वह बच्चे को प्रतिदिन अपनी पीठ पर बैठाकर समुद्र की सैर कराने ले जाता था. बच्चे की मृत्यु से उसे इतना धक्का पहुंचा कि उसने भी प्राण त्याग दिये. जान सी.लिली तथा अन्य कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि सूंस मनुष्य जितना ही बुद्धिमान हो सकता है. लिली सूंसों की भाषा को समझने के और उन्हें मानवीय भाषा सिखाने के प्रयास में हैं.

    सूंस और चिंपैंजी की बुद्धिशक्ति की तुलना करना अति कठिन है, क्योंकि इस तरह के दो अत्यंत भिन्न जीवों पर तुलनात्मक प्रयोग कर पाना लगभग असम्भव होता है. इसी तरह की कठिनाइयां इसी तरह के अन्य प्रयोगों में भी आती है. उदाहरण के लिए. क्या भूल-भुलैया में सही मार्ग खोज निकालना तथा मेज पर रखी तीन वस्तुओं में अटपटी वस्तु को चुन निकालना एक-सी बुद्धिशक्ति के प्रमाण हैं?

    प्रायः और भी एक गलती हो जाती है. प्रयोग करते समय इन प्राणियों को बहुधा मनुष्य जैसा समझ लिया जाता है. अधिकांश प्रयोग दृष्टि-शक्ति से सम्बंधित होते हैं. मनुष्य ज्यादातर ज्ञान दृष्टि द्वारा ही प्राप्त करता है. मगर पशु-पक्षी अधिकांश ज्ञान दृष्टि के द्वारा नहीं, अपितु श्रवण और गंध द्वारा प्राप्त करते हैं.

    इस कठिनाई से पार पाने का एक उपाय है मस्तिष्क का वजन मापना, यानी शरीर के वजन के अनुपात में मस्तिष्क का वजन कितना है, यह ज्ञात करना. विशालकाय ह्वेलों का मस्तिष्क सबसे भारी होता है. लेकिन ह्वेल के मस्तिष्क को सौ टन वजन के शरीर का संचालन भी करना होता है. फलतः तर्क आदि उच्चतर बौद्धिक कार्यों के लिए उनके मस्तिष्क की थोड़ी ही कोशिकाएं उपलब्ध हो पाती होंगी. सूंस का मस्तिष्क करीब 400 पौंड का होता है और शरीर 300 पौंड का. यह अनुपात बुद्धिमान होने के लिए अधिक अनुकूल है.

    इस पैमाने पर हाथी को मापना कठिन है. मनुष्य के मस्तिष्क की तुलना में उसका मस्तिष्क चार गुना भारी होता है, लेकिन उसका शरीर भी तो मनुष्य-शरीर से 46 गुना भारी होता है. हाथी की बुद्धिमत्ता के बारे में भिन्न-भिन्न मत हैं. कुछ लोग उसे सबसे बुद्धिमान जीवों में गिनते हैं. जे.एच. विलियम्स आंखों देखा एक किस्सा सुनाते थे. एक महावत ने अपने हाथी से कहा कि बरछी उठाकर दो. हाथी ने बरछी अपनी सूंड में उठायी तो सही, मगर उसका फल महावत की ओर करके आगे बढ़ाया. इस पर महावत ने उसे आदेश दिया कि बरछी की नोंक को नीचे करो, और हाथी ने वैसा ही किया.

    मगर इससे उलटी राय है रिचार्ड कैरिंग्टन की. उन्होंने हाथियों का गहरा अध्ययन किया है. वे लिखते हैं- ‘घोड़े की तुलना में हाथी बहुत अधिक बुद्धिमान है, इसमें शक है, और जो भावुक अश्वप्रेमी नहीं हैं, वे सभी सम्भवतः स्वीकार करेंगे कि घोड़ा काफी बुद्धू पशु है.’

    एक बात से प्रायः सभी विज्ञानी सहमत हैं कि पशुओं में स्तनपायियों का बुद्धिमत्ता पर लगभग एकाधिकार है. औजारों का प्रयोग करना भी बुद्धिमानी का एक चिन्ह है. गालापगोस द्वीप का कठफोड़वा कैक्टस की डंडी से वृक्षों की दरार अथवा छिद्र से कीड़े-मकोड़े निकालकर खाता है. कुछ लोग कौए और उसके भाईबंदों को भी बहुत नम्बर देते हैं. शिकारी की बंदूक की पहुंच से दूर रहने की कला कौआ खूबी जानता है. और कुछ वैज्ञानिकों का यह खयाल है कि काग और तोते में मनुष्य की बोली के चंद शब्द सीखने की जो क्षमता है, वह केवल आनुवंशिक क्षमता नहीं, बल्कि बुद्धिशक्ति का प्रमाण है.

    समस्याएं सुलझा लेना ही बुद्धिमत्ता का एकमात्र लक्षण नहीं. ऊदबिलाव ओटर को काफी बुद्धिमान जीव माना जाता है और उसका एकमात्र कारण है- उसका क्रीडा-कौशल. ऊदबिलाव बर्फ अथवा कीचड़ पर रपटीले धरातल तैयार करके उन पर घंटों खेलते रहते हैं. और बड़े जटिल होते हैं उनके खेलों के नियम.

    प्रतिकूलताओं के बीच जीवित रह पाना भी बुद्धि का प्रमाण है. उत्तर अमरीका का छोटा भेड़िया कोयोट विपरीत परिस्थियों में भी जिस ढंग से जी रहा है, यह आश्चर्य की बात है, कोयोट झुंड बांधकर इस तरह दौड़ते हैं कि पीछा करने वाले शिकारी कुत्ते थककर चूर-चूर हो जायें. और पीछा करने वालों को चकमा देने के लिए वे चलती गाड़ी या मोटर पर कूदकर चढ़ जाते हैं, और बच निकलते हैं. वह लगभग सर्वभक्षी है, और अपने से छोटे शीकारी प्राणियों के मुंह से कौर छीन लेता है. उसे ‘सबसे चुस्त बदमाश’ कहा जाता है.

    जीवित रहने की कसौटी पर तो चूहा भी बहुत खरा उतरता है, खासकर यह देखते हुए कि मनुष्य ने उसके उन्मूलन के लिए युद्ध छेड़ रखा है. चूहे बड़ी तेजी से बच्चे पैदा करते हैं, यह भी चूहा जाति के जीवित रहने में सहायक है, मगर इसमें उनकी धूर्तता का भी कम हाथ नहीं है. पिंजरे में चूहों के आगे बड़े आकार के कुछ बिस्कुट रख दिये गये. बिस्कुट इतने चौड़े थे कि पड़ी अवस्था में उन्हें सींखचों में से खींचकर पिंजरे में से हाथ बढ़ाकर बिस्कुटों को सीधा खड़ा किया और अंदर खींच लिया.

    वूल्वरीन ने अपनी धूर्तता और दुष्टता के बल पर बुद्धिमान जानवर का ओहदा पा लिया है. तीस पौंड का यह मांसाहारी पशु शिकारी की हर चाल को आसानी से नाकाम कर सकता है. बहुधा वह फंदे को भी लेकर चंपत हो जाता है यही नहीं, वह शिकारी के खेमें को तहस-नहस भी कर सकता है.

    वाह (रैकून) में इसी तरह की क्षमता है, लेकिन वह ज्यादा मैत्रीपूर्ण प्रकृति का जीव है.

    वैज्ञानिकों को जितना ही अधिक ज्ञान होगा, वे पशुओं की स्वाभाविक जीवन-चर्या पर उतने ही अच्छे प्रयोग कर सकेंगे और उनके आधार पर मानव के पशु-रिश्तेदारों की बुद्धि को अधिक निश्चित रूप से आंका जा सकेगा.

(मई  2071)

]]>
https://www.navneethindi.com/?feed=rss2&p=1139 0