संस्कृति-समाचार (फ़रवरी, 2014)

‘देश की सुरक्षा के प्रति सरकार गंभीर नहीं है’

मुंबई के गोरेगांव पूर्व स्थित गोकुलधाम हाईस्कूल में माधव सेवा फाउंडेशन की ओर से ‘देश की सुरक्षा के प्रति सरकार गंभीर नहीं है’ विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. इस अवसर पर पूर्व नौसेना प्रमुख एड. विष्णु एन. भागवत ने  कहा कि आज देश को ऐसे युवाओं की ज़रूरत है जो अपनी बात निर्भीकता से रख सकें. नवभारत टाइम्स के राजनयिक सम्पादक रंजीत कुमार, मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. करुणाशंकर उपाध्याय ने भी विषय पर अपने विचार रखे. संचालन आदित्य राठी तथा आभार नरेश सिंघानिया ने दिया.  निर्णायक के तौर पर राजेंद्र तुलस्यान, श्यामसुंदर संगई, डॉ. बिनीता सहाय, पत्रकार संजय प्रभाकर तथा अमित द्विवेदी मौजूद थे. 

डॉ चकाचौंध ज्ञानपुरी को ‘हास्य व्यंग्य सम्राट अलंकरण’

डॉ चकाचौंध ज्ञानपुरी की षष्टिपूर्ति के अवसर पर पराड़कर भवन में काशीनाथ सिंह द्वारा उनका सम्मान किया गया. डॉ चकाचौंध ज्ञानपुरी को प्रो. काशीनाथ सिंह ने ‘हास्य व्यंग्य सम्राट अलंकरण’ और चांदी का मुकुट पहनाया. इस अवसर पर लगभग दो दर्जन साहित्यिक -सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने उन्हें माल्यार्पण किया. 

वनमाली सृजन पीठ का ‘रचना प्रसंग’

कविता के मुख्तलिफ रंगों और अहसासों से महकते पैगाम लिए करीब एक दर्जन कवि-शायरों ने आनन्द नगर स्थित वनमाली अध्ययन केद्र में शिरकत की. समाजसेवी गेंदालाल राठौर के सौजन्य से प्राप्त वनमालीजी के चित्र का अनावरण डॉ. सफदर रजा खण्डवी तथा विनय उपाध्याय ने किया.  ललित निबन्धकार डॉ. श्रीराम परिहार का शॉल-श्रीफल भेंट कर श्रीकृष्ण उपाध्याय ने अभिनन्दन किया. 

शैलपुत्री को शैलप्रिया सम्मान

रांची विश्वविद्यालय के शहीद स्मारक प्रेक्षागृह में हिंदी के सुविख्यात कवि मंगलेश डबराल ने कवयित्री निर्मला पुतुल को पहला शैलप्रिया सम्मान प्रदान किया.  मंगलेश डबराल ने निर्मला पुतुल और शैलप्रिया दोनों की कविताओं पर अलग से बात करते हुए उनमें निहित करुण मानवीयता को रेखांकित किया. पुरस्कार के रूप  में निर्मला पुतुल को 15000 रुपये की सम्मान राशि, शाल, मानपत्र और स्मृतिचिह्न प्रदान किया गया. सम्मान समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ आलोचक खगेंद्र ठाकुर ने की. कार्यक्रम का संचालन रणेंद्र ने किया. स्वागत भाषण विद्याभूषण और धन्यवाद ज्ञापन अनुराग अन्वेषी ने दिया. 

सच्चा इतिहास उस कालखंड में लिखी जाने वाली कृतियां हैं – दामोदर खड़से

“सच पूछा जाए तो सच्चा इतिहास उस काल खंड में लिखी जाने वाली कृतियां हैं. अब उपदेश देने का वक्त समाप्त है. वह बोलिए जिसे सुनने वाला भीतर से महसूस करे. अपने विचारों से जोड़ना कथनी को बेकार करना है,” यह उद्गार समारोह के प्रमुख अतिथि डॉ.दामोदर खड़से ने श्री राजस्थानी सेवा संघ सभागार अंधेरी पूर्व मुम्बई में श्री जे.जे.टी विश्वविद्यालय के साहित्यिक एकांत हेमंत फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित विजय वर्मा कथा सम्मान एवं हेमंत स्मृति कविता सम्मान के अवसर पर व्यक्त किए. डॉ.दामोदर खड़से द्वारा शरद सिंह एवं दिनकर जोशी द्वारा हेमंत स्मृति कविता सम्मान हरेप्रकाश उपाध्याय को प्रदान किया गया. पुरस्कार स्वरूप ग्यारह हज़ार रुपए की धनराशि स्मृतिचिन्ह, शॉल एवं श्रीफल प्रदान किया गया. संचालन आलोक भट्टाचार्य ने किया.

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