मई  2015

Cover - May 15

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

कुलपति उवाच

स्वभाव, स्वकर्म और स्वधर्म

के.एम. मुनशी

शब्द यात्रा

आंख और हाथ

आनंद गहलोत

पहली सीढ़ी

अर्थभरी आवाज़ लगाओ

हरीश भादानी

आवरण-कथा

बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे

सम्पादकीय

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ

रमेश उपाध्याय

हम कितने मानवीय चेतना सम्पन्न हैं?

प्रियंवद

बोलने की आज़ादी तो है, पर…

न्यायमूर्ति चंद्रशेखर धर्माधिकारी

शब्द और छवि की मर्यादा

रमेश नैयर

धारावाहिक आत्मकथा

पुरोगामिनी (अंतिम कड़ी)

डॉ. सुधा

नोबेल कथा

वहमी

हरमन हेस

व्यंग्य

अभिव्यक्ति के कुदरती तत्त्व

यज्ञ शर्मा

गूंगी प्रजा का वकील

शशिकांत सिंह ‘शशि’

आलेख

खुले जलाशय के पास ठण्डी छांह में

प्रभाकर श्रोत्रिय

गांधी-कथा का गायक

अमृतलाल

मनुष्य का जगतीकरण एक सांस्कृतिक लक्ष्य

किशन पटनायक

हिमाचल प्रदेश का राज्यपक्षी – जुजुराना

डॉ. परशुराम शुक्ल

‘वन के सन्नाटे के साथ मौन हूं’

रमेशचंद्र शाह

सूरज सिर्फ मेरा नहीं

वेद राही

अपना मूल पछाण

सुरेंद्र बांसल

सखि! वे मुझसे कहकर जाते!

श्यामसुंदर दुबे

अपने देश में अजनबी लग रहा हूं!

जुलियो रिबेरो

परिवार के लिए प्राण भी न्यौछावर

माधव गाडगिल

पीड़ा कराह न पाने की

राधारमण त्रिपाठी

प्रेम बहती नदी है

डॉ. दुर्गादत्त पाण्डेय

किताबें

कथा

‘मैं ज़िंदा हूं’

कृष्णा अग्निहोत्री

अपनी धरती

रामस्वरूप अणखी

कविताएं

दो कविताएं

शिवमंगल सिंह ‘सुमन’

दोहे

निदा फाजली

दो कविताएं

यश मालवीय

समाचार

भवन समाचार

संस्कृति समाचार

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