गिनती के शब्द

आनंद गहलोत

संख्यावाचक वैदिक शब्द; जो ध्वनि सुनते ही या सूरत देखते ही अनायास पहचाने जा सकते हैं, वे हैं– द्वि/द्व (दो), त्रि (तीन), षष (छह), अष्ट (आठ) नव (नौ). ‘द्वि’ लैटिन व यूनानी में ‘दुओ’, रूसी में ‘द्वा’ है. अन्य यूरोपीय भाषाओं में मिलता-जुलता रूप है. पुरानी अंग्रेज़ी में यह ‘ट्व’ था. आधुनिक अंग्रेज़ी में हो गया ‘टू’. ‘द्व’ की ‘व’ ध्वनि ‘टू’ के स्पेलिंग में डब्लू के रूप में है; लेकिन मौन.

वैदिक ‘त्रि’ भले ही हिंदी में तीन हो गया; लेकिन ग्रीक, रूसी और लैटिन में अपने हज़ारों वर्ष पुराने रूप ‘त्रि’ में ही है. अंग्रेज़ी में ‘थ्री’ हो गया, ‘षष’ हिंदी में ‘छह’ हो गया; लेकिन रूसी में ‘षष’ के निकटतम रूप ‘शेस्त्य’ में है. यूनानी में ‘षष’ ‘हेक्स’ हुआ. अंग्रेज़ी में हुआ ‘सिक्स’. संस्कृत के नव, नवम् (नौ) ने लैटिन में ‘नोवेम’ और अंग्रेज़ी में ‘नाइन’ का रूप धारण किया. उत्तर भारत के कुछ अंचलों में जैसे ‘भाषा’ ‘भाखा’ में बदल गयी वैसे ही ‘अष्ट’ जर्मनी में ‘ऑख्ट’ में बदल गया. अंग्रेज़ी में बना ‘एट’ (आठ) लेकिन स्पेलिंग ‘अष्ट’ की मध्यवर्ती ध्वनि को ‘जी एच’ रूप में छिपाये हुए है.

वैदिक चतुर/चत्वार (चार) यूरोप की अनेक भाषाओं की मूल लैटिन में ध्वनि परिवर्तन नियमों के प्रभाव से ‘क्वतुओर’ हो गया. अंग्रेज़ी ‘क्वार्टर’ का सगा-सम्बंधी यही शब्द है. लैटिन में संस्कृत ‘च’ व्यापक रूप से ‘क’ में बदला. अंग्रेज़ी में ‘फोर’ बनने में काफ़ी समय लगा. पंच (पांच) यूनानी में ‘पेंते’ हुआ, ‘सप्त’ यूनानी में ‘हेप्त’ हुआ. अंग्रेज़ी में ‘सेवेन’ रूप धारण करने में कम से कम सात सौ वर्ष से भी अधिक समय लगा. संस्कृत दश (दस) यूनानी में ‘डेक’ हुआ, अंग्रेज़ी में ‘टेन’ कहां से और कैसे आया, एक लम्बी कहानी है. विशंति (बीस) लैटिन में ‘विजिंति’ हो गया.

अंग्रेज़ी में पूरण प्रत्यय ‘थ’ लगाकर क्रमांक बनाने की पद्धति- जैसे फोर से फोर्थ, फाइव से फ़िफ़्थ, संस्कृत के ‘चतुर’ से चतुर्थ- पर आधारित है.

यूरोप में ‘एक’ के सिंहासन पर ‘वन’ और अन्य मिलते-जुलते शब्द कैसे बैठे, इनकी बहुत ही लम्बी कहानी है; फिर भी एक शब्द ‘एक’ के ही परिवार का है वह है ‘एस’ (स्पेलिंगः ए सी इ). ताश के खेल में ‘एस’ इक्के को कहते हैं. यूरोप में ‘स’ और ‘क’ ध्वनि अपनी जगह बदलती रहती है. अक्षर ‘सी’ का उच्चारण ‘स’ और ‘क’ दोनों है.

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