अक्टूबर 2019

कुलपति उवाच 

03    भारत जियेगा कैसे?

      के.एम. मुनशी

अध्यक्षीय

04    तमसो मा ज्योतिर्गमय

      सुरेंद्रलाल जी. मेहता

पहली सीढ़ी

11    प्रकाश, ओह! प्रकाश कहां है?

      रवींद्रनाथ ठाकुर

आवरण-कथा

12    एक सम्भव सम्भावना

      सम्पादकीय

14    गांधी सम्भावना ही नहीं विकल्प भी हैं

      शिवदयाल

19    गांधी के लिए इक्कीसवीं सदी 

      कनक तिवारी

25    गां से गांधी गां से गांव 

      प्रकाश चंद्रायन

35    गांधी का अंत क्यों नहीं होता? 

      प्रकाश दुबे

40    अंधेरे में प्रकाश

      सविता प्रथमेश

43    बा-बापू

      रामदास भटकळ

49    आइए, हम गांधी को श्रद्धांजलि देने….

      जवाहरलाल नेहरू

व्यंग्य

86    मीडिया और मुंगेरीलाल 

      शशिकांत सिंह `शशि’

धारावाहिक उपन्यास 

101   योगी अरविंद (तीसरी किस्त)

      राजेंद्र मोहन भटनागर

शब्द-सम्पदा

138   ऑनर किलिंग के बहाने महिमा गोत्र की

      अजित वडनेरकर

आलेख 

70    आज फिर हमें महात्मा गांधी की ज़रूरत है

      बलराज साहनी

82    खैयाम अर्थात शब्द-राग की सम्मानभरी जुगलबंदी

      जितेंद्र भाटिया

92    जनवादी पत्रकारिता का हलधर

      आलोक भट्टाचार्य

96    या देवी सर्वेभूतेषु कांति रूपेण संस्थिता!

      संतन कुमार पांडेय

120   क्या सचमुच एक असम्भव 

      सम्भावना हैं गांधी?

      संजय द्विवेदी 

123   कलकत्ता ने लाज रख ली थी अहिंसा की

      सुधीर चंद्र

136   किताबें

कथा

55    बापू की अंतर्व्यथा

      नंदकिशोर आचार्य

77    लाहौर की जगमाई

      डॉ. चंद्र त्रिखा

कविताएं

76    रोशनी की रीढ़

      यश मालवीय

90    तीन कविताएं

      मोहन कटारिया

119   कथांश

      नीरज मनजीत

समाचार

140   भवन समाचार

144   संस्कृति समाचार

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