राष्ट्रीयता और मानवता एक ही चीज़ है  –  महात्मा गांधी

आवरण–कथा मैं अपने देश की स्वतंत्रता इसलिए चाहता हूं ताकि दूसरे देश मेरे स्वतंत्र देश से कुछ सीख सकें और देश के संसाधनों का उपयोग मानव जाति के हित के लिए किया जा सके. जिस प्रकार राष्ट्रप्रेम का मार्ग आज…

रवींद्रनाथ की वैश्विक दृष्टि –  रामशंकर द्विवेदी

आवरण–कथा रवींद्रनाथ की वाणी, उनका काव्य, उनकी शिल्पचेतना, उनका सौंदर्य चिंतन, सभी में एक उदार दृष्टि मिलती है. उनमें मानवतावाद और स्वदेश भक्ति कूट–कर भरी हुई थी. वे पूर्व और पश्चिम के बीच एक सेतु थे. उनमें राष्ट्रबोध था, वे…

बीज ऩफरत के न बोने देंगे  – राजकिशोर

आवरण–कथा मैं समझता हूं कि राष्ट्रीयता पर वही नियम लागू होना चाहिए जो कानून किसी व्यक्ति के अपराधी होने या न होने के बारे में लागू होता है. इस नियम के अनुसार, जब तक यह सिद्ध नहीं हो जाता कि…

आस्था – हरमन हेस्से (पहली सीढ़ी)

।। आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः।। कूड़ा–कर्कट, अस्थियों, कंकालों, ताकतों और नयी खुदी कब्रों की मिट्टी के ढेर– दूर तक फैले हुए इस तरह यह सृष्टि समाप्त हो रही और समाप्त हो रहा है मेरा यह जीवन भी! और मैं…

मनुष्य सीमित, पृथक इकाई नहीं है (अध्यक्षीय) मई 2016

भारत में रहस्यवाद, वास्तविक न सही पर आध्यात्मिक अनुमानों में या कम से कम इसकी दर्ज अभिव्यक्ति में, मानव परिवार की अन्य शाखाओं से पहले का है. ज़्यादातर आध्यात्मिक समस्याओं को, जिनका आज के साधक सामना कर रहे हैं, भारत…

मई 2016

राष्ट्रवाद को लेकर दुनिया भर में चर्चाएं होती रही हैं. इसकी आवश्यकता और इसके खतरों को लेकर विद्वानों में इतिहास जितनी पुरानी बहस चलती रही है. इसी राष्ट्रवाद के चलते दुनिया ने दो विश्वयुद्धों की विभीषिका झेली है और इसी…