पद्मा बिनानी फाउंडेशन ‘वात्सल्य पुरस्कार’ 2012-13

पद्मा बिनानी फाउंडेशन का बच्चों के साहित्य के लिए प्रतिष्ठित 7वां वात्सल्य पुरस्कार, 2012-2013 बाल साहित्य में मलयालम लेखिका, श्रीमती सुमंगला को सम्मानित किया गया. विश्वनाथ सचदेव, राज पुरोहित (पूर्व मंत्री- महाराष्ट्र) और पद्मा बिनानी इस अवसर पर मौजूद थे.…

होना कुछ नहीं का

बोर्ड लगा है. खादी भंडार. आयताकार काउंटर, लम्बे, पीछे आलमारियों में खादी के थान. हल्के रंगों में मोटे कपड़े. कोसा, साड़ियां, खादी, रेशम और कुछ रेडिमेड कपड़े. आलमारी पर यहां-वहां धूल, बाहर कभी-कभी अंधड़-सा चल जाता है. अभी सुबह के…

अमृत का सहोदर ‘रस’ मिल गया

अंत में तय हुआ कि समुद्र मथकर अमृत निकाला जाए. पहले तो वासुकि नाग अड़ गया कि वह अपनी देह की दुर्गति नहीं कराएगा. पर शिष्टमंडल में जृम्भ और सुमाली जैसे क्रूर-कर्मा दैत्य भी थे. अतः कुछ इनके डर से…

रसों का रोमांस

वे नौ थे. सबके सब रसीले. खट्टे, मीठे, चटपटे. जी हां, वे नवरस थे. सबके गुण अलग. स्वभाव अलग. चरित्र अलग. लेकिन पक्के दोस्त. जब भी मूड में आते और साथ मिल जाते, तो साहित्य का स्तर ऊपर उठा देते.…

इन दिनों

इन दिनों बेहद ज़रूरी है बचाये रखना कुछ शब्दों को बड़े जतन से जैसे बचायी जाती है खड़ी फसल जंगली जानवरों से हांका लगाकर.   जैसे बचाये जाते हैं दाल और मसाले सीलन और घुन से चटख धूप की चादर…

जीवन रसमय बना रहे

भरत मुनि के रस-सिद्धांत अथवा मम्मट द्वारा की गयी रसों की व्यवस्था-व्याख्या को हम जीवन के लिए बोझिल मानकर भले ही नकार दें, पर रस को जीवन से निष्कासित करके जीवन को पूरी तरह समझा नहीं जा सकता. रस और…