Category: धारावाहिक

शरणम् – नरेंद्र कोहली (धारावाहिक उपन्यास – 4)

धृतराष्ट्र को कुछ व्याकुल देख, संजय ने पूछा- ‘कुछ चाहिए महाराज?’ ‘थोड़ा जल.’ धृतराष्ट्र ने कहा- ‘और संजय, चलो, हम गंगा-तट वाली वाटिका में बैठें? उस दिशा में वातास का बड़ा सुख है.’ धृतराष्ट्र आशंकित था कि यदि कहीं गांधारी…

शरणम् (धारावाहिक उपन्यास – 3) नरेंद्र कोहली

गीता एक धर्म-ग्रंथ है और जीवन-ग्रंथ भी. जीवन के न जाने कितने रहस्यों की परतें खोलने वाला ग्रंथ बताया गया है इसे. पर गीता का कथ्य किसी उपन्यास का कथ्य भी बन सकता है, यह कल्पना ही चौंकाती है. वरिष्ठ-चर्चित…

शरणम् (भाग– 2)  नरेंद्र कोहली

धारावाहिक उपन्यास – 2 गीता एक धर्म-ग्रंथ है और जीवन-ग्रंथ भी. जीवन के न जाने कितने रहस्यों की परतें खोलने वाला ग्रंथ बताया गया है इसे. पर गीता का कथ्य किसी उपन्यास का कथ्य भी बन सकता है, यह कल्पना…

शरणम् – नरेंद्र कोहली

धारावाहिक उपन्यास – 1 (गीता एक धर्म-ग्रंथ है और जीवन-ग्रंथ भी. जीवन के न जाने कितने रहस्यों की परतें खोलने वाला ग्रंथ बताया गया है इसे. पर गीता का कथ्य किसी उपन्यास का कथ्य भी बन सकता है, यह कल्पना…

पुरोगामिनी (उपन्यास) भाग – 4

‘संसार के लोग दुख भुलाना जानते हैं. ‘समय’ उनके दुख को व्यतीत करा देता है; उनके पास दुख से ध्यान बंटाने के अनेक साधन हैं. मृत्यु का शोक सामयिक होता है.’ ‘मेरा मन किसी वस्तु से सुख नहीं पा सकेगा.…