Category: स्तंभ

चलो लोकशाला चलें! –  रमेश थानवी

विद्यालय के लिए एक प्रचलित शब्द है ‘पाठशाला’ और दूसरा प्रचलित शब्द है ‘विद्याशाला’. दोनों शब्दों का स्थान लगभग सभी प्रदेशों में स्कूल ने ही ले लिया है. स्कूल से आशय ऐसे स्थान से है जहां अपनी विद्या आरम्भ करने…

एक अपराधी, एक लेखक, एक संत – – सुनील गंगोपाध्याय

न्यूड स्टडी फ्रांसीसी कला से अंतरंग भाव से जुड़ी हुई है. कविता-उपन्यास में कैसा ही वर्णन हो, किसी भी शब्द को वह अश्लील नहीं मानती है. उन दिनों फ्रांसीसी साहित्य में जां-जेने को लेकर खूब चख-चख मची हुई थी. जेने…

शरणम् – नरेंद्र कोहली (धारावाहिक उपन्यास – 4)

धृतराष्ट्र को कुछ व्याकुल देख, संजय ने पूछा- ‘कुछ चाहिए महाराज?’ ‘थोड़ा जल.’ धृतराष्ट्र ने कहा- ‘और संजय, चलो, हम गंगा-तट वाली वाटिका में बैठें? उस दिशा में वातास का बड़ा सुख है.’ धृतराष्ट्र आशंकित था कि यदि कहीं गांधारी…

‘भारत माता की जय’  –  आशुतोष भारद्वाज

आवरण–कथा आधुनिक भारतीय कला के इतिहास में सिर्फ दो बड़े कलाकार ऐसे हुए हैं, जिन्होंने भारत माता को अपने केनवास पर सजाया है. पहला चित्र बंगाली पुनर्जागरण काल के अवनींद्रनाथ ने बनाया था, जिसमें उन्होंने भारत राष्ट्र को मां के…

एकात्मता के प्रेम-पाश में बद्ध होता है राष्ट्र  –  सुनीलकुमार पाठक

आवरण–कथा राष्ट्र, राष्ट्रीयता और राष्ट्रवाद–वर्तमान में विमर्श का एक प्रमुख विषय है. ‘राज्’ धातु में ‘ष्ट्रन्’ प्रत्यय के योग से ‘राष्ट्र’ शब्द की निष्पत्ति हुई है, जिसका अर्थ है– राज्य, देश, साम्राज्य, जनपद, प्रदेश, मंडल आदि. भारतीय संविधान की ‘उद्देशिका’…