शब्द-यात्रा
भाषा में आतंक
आनंद गहलोत
पहली सीढ़ी
ओ सूरज!
स्वामी संवित् सोमगिरि
आवरण-कथा
कब अपने कहलायेंगे अपनी बस्ती के बच्चे
रमेश थानवी
मासूम बचपन पर कुपोषण की मार
भुवेंद्र त्यागी
बच्चों को छोटे हाथों से चांद -सितारे छूने दो
सरोज बाला चंदोला
बच्चे काम पर जा रहे हैं
विजय कुमार
ऐसे भी जीता है बचपन
एन. भानुतेज
बच्चों के बारे में कुछ बेतरतीब नोट्स
स्वयं प्रकाश
यह भी बचपन !
सुधा अरोड़ा
मेरी पहली कहानी
एक चुप्पी क्रॉस पर चढ़ी
प्रभु जोशी
आलेख
स्त्री की वैचारिक अभिव्यक्ति पर जड़े तालों का सत्य
चित्रा मुद्गल
नेहरू का अंतर्द्वंद्व
विश्वनाथ
जब-जब उनसे मिला… अनेरा ही पाया उन्हें
मार्तण्ड उपाध्याय
साहित्य साधना की सफलता-सार्थकता का अर्थ
कुसुमाग्रज
मध्य प्रदेश का राज्यपक्षी – दूधराज
डॉ. परशुराम शुक्ल
‘सुब्हे बनारस’ का एक मतलब यह भी
डॉ. प्रमोद कुमार सिंह
…ताकि प्रभु की स्तुति में हाथ उठा सकें
संत राजिंदर सिंह
बदलती वैश्विक सभ्यता की बिंदास अभिव्यक्ति का हस्ताक्षर
ज्यां मॅरी गुस्ताव ली क्लेजियो
डॉ. कृष्ण कुमार रत्तू
व्यंग्य
गुमशुदा
दीवान तलदार
किताबें
धारावाहिक-उपन्यास (भाग-6)
महात्मा विभीषण
सुधीर निगम
अध्यक्ष का सम्बोधन
धरोहर
ईदगाह (कहानी)
प्रेमचंद
कविताएं
दो कविताएं
यज्ञ शर्मा
बचपन मेरा वापस ला दो
कैलास पंडित
बच्चे हंस रहे हैं
वसंत आबाजी डहाके
बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता
राजेश जोशी
शब्द-यात्रा
तपिश दिल की बुझा लेना
आनंद गहलोत
पहली सीढ़ी
चल अकेला रे…
रवींद्रनाथ ठाकुर
आवरण-कथा
आगे बढ़ना है तो चलना ही पड़ेगा
डॉ. कन्हैयालाल नंदन
सभ्यता में पहिया
अनूप सेठी
साइकिल-चिंतन
विजय कुमार
तब जीवन का छंद कविता बनता है
नारायण दत्त
मेरी पहली कहानी
अपना घर
अचला नागर
आलेख
अर्द्ध-पर्व का पूर्ण सत्य
हिमांशु जोशी
चले आते हैं, जाने कहां-कहां से
डॉ. देवव्रत जोशी
कालीन बनवाने से अच्छा है जूते ही खरीद लें
सीताराम गुप्त
तारकशी का तराना
जय कुमार पाठक
सिक्किम का राज्य पक्षी – चिलमे
डॉ. परशुराम शुक्ल
एक बच्चे की आखिरी ख्वाहिश
शकील अहमद
स्वर्ग से सुंदर है घर
ओमप्रकाश पोरवाल
मूवी कैमरा मेरी तीसरी आंख था
राधू करमाकर
क्योंकि वह मां है
लाजपतराय सभरवाल
अपने प्रयोजन से भटकी हुई शिक्षा
नंदकिशोर आचार्य
अदम्य संघर्ष की अनूठी दास्तान
डॉ. मंगला अनुजा
किताबें
अंतर्कथा एक आरती की
राधारमण त्रिपाठी
संजीवनी का सच क्या है?
डॉ. ओ.पी. जोशी व डॉ. जयश्री सिक्का
व्यंग्य
सबसे बड़ी खबर
राधेश्याम
धर्म
आपने आध्यात्मिक परिवार बनाया है?
आचार्य महाप्रज्ञ
भीजै दास कबीर
रामविलास जांगिड़
विनाश का आह्वान
देवेश सिंगी
यात्रा-कथा
कृतज्ञ हूं, यमुनोत्तरी का दरस-परस हुआ
कृष्णनाथ
अनुभूति
दुनिया आज भी सुंदर है…जीने योग्य!
मन्नू भंडारी
कहानियां
और कितनी दूर
शीला इंद्र
राजा का प्रश्न (लघुकथा)
ज़हीर कुरेशी
नन्ही बुलबुल
कमलेश बख्शी
आनंद (लघुकथा)
कमला प्रसाद चौरसिया
मातमपुरसी
अभिमन्यु अनत
अपराधी (लघुकथा)
सतीश उपाध्याय
ईश्वरनीति (लघुकथा)
ज्ञानदेव मुकेश
ज्ञान क्या है ?(बोधकथा)
नीरज भारद्वाज
कविताएं
देखना, एक दिन
शम्भु गुप्त
शब्द
वेद राही
कुछ दोहे ग्रीष्म के
इसाक ‘अश्क’
पारदर्शियों वाले दिन
नईम
चिड़िया
रामकुमार आत्रेय
समाचार
संस्कृति – समाचार
भवन के समाचार
निस्संदेह विकास के ढेर सारे टापू विकसित किये हैं हमने, लेकिन हमारे गांव कुल मिलाकर अभी इस विकास की परिधि पर ही हैं. दुर्भाग्य तो यह भी है कि हमारी ग्राम-सभ्यता और ग्राम-संस्कृति भी इस दौरान लगातार क्षरित हुई है, क्षत-विक्षत भी. परम्परा और कथित आधुनिकता के एक द्वंद्व ने हमारे ग्रामीण जीवन, ग्रामीण सोच और ग्रामीण संस्कृति को ऊहापोह के एक ऐसे जंजाल में फंसा दिया है, जिसमें से निकलना कठिन होता जा रहा है. आज विकास के नाम पर जो कुछ हो रहा है, वह ऊपरी तहों तक ही सीमित है. सवाल यह भी है कि यह सारा कथित विकास जीवन को किस दिशा में ले जा रहा है? इस अंक में हमारे विचारकों ने इस प्रश्न का उत्तर खोजने का एक प्रयास किया है. कोशिश की गयी है यह जानने की कि गांव गांव से बेदखल क्यों होता जा रहा है? क्या नया यथार्थ है हमारे ग्रामीण भारत का, और उसे क्या सार्थक दिशा और अर्थ दिया जा सकता है? आवश्यकता खंडहरों के पुनर्निर्माण की ही नहीं, खंडहरों के अतीत को समझने की भी है.
कुलपति उवाच
आर्य संस्कृति की नींव
कनैयालाल माणिकलाल मुनशी
शब्द-यात्रा
ग्राम और नगर
आनंद गहलोत
पहली सीढ़ी
निवेदन
रवींद्रनाथ ठाकुर
आवरण-कथा
सम्पादकीय
गांव से बेदखल होता गांव
रामचंद्र मिश्र
चरमरा रहा है हमारा बुनियादी सामाजिक ढांचा
विजय कुमार
भारत का दर्पण
महाश्वेता देवी
हम गांव भी उजाड़ रहे हैं और शहर भी
अनुपम मिश्र
दो गांवों की कहानी
कहां खो गया मेरा गांव
कृष्णबिहारी मिश्र
पूरे थे अपने आप में आधे-अधूरे लोग
विवेकी राय
60 साल पहले
प्रतिभा में पंख लगाइए
मेरी पहली कहानी
देवकली का व्याह
आर. के. पालीवाल
आलेख
भारतीय चित्रकला को रवींद्रनाथ ठाकुर ने नयी ज़मीन दी थी
अशोक भौमिक
फ़ैज तो खुदा हाफिज कहकर चले गये
एलिस फ़ैज़
‘राग दरबारी’ का गांव
श्रीलाल शुक्ल
गांव वाला बेटा
बालेश्वर राय
नंगे सेनापति का प्रायश्चित
रॉयन लोबो
मेरे अंदर की औरत
अमृता प्रीतम
गोदान की रचना का रहस्य
डॉ. कमल किशोर गोयनका
किताबें
व्यंग्य
आम्ही जातो आमुच्या गांवा
यज्ञ शर्मा
स्वर्गलोक में नेताजी
नरेश शर्मा
धारावाहिक उपन्यास
कंथा (तेइसवीं किस्त)
श्याम बिहारी श्यामल
कविताएं
ग्राम काव्य
त्रिलोचन
भवानीप्रसाद मिश्र
कैलाश गौतम
केदारनाथ सिंह
सुमित्रानंदन पंत
रेमिका थापा
सुनीता जैन
कहानियां
अंतहीन
जसविंदर शर्मा
अहंकार का फल
ज्ञानदेव मुकेश
समाचार
संस्कृति समाचार
भवन समाचार
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