शब्द-यात्रा
तपिश दिल की बुझा लेना
आनंद गहलोत
पहली सीढ़ी
चल अकेला रे…
रवींद्रनाथ ठाकुर
आवरण-कथा
आगे बढ़ना है तो चलना ही पड़ेगा
डॉ. कन्हैयालाल नंदन
सभ्यता में पहिया
अनूप सेठी
साइकिल-चिंतन
विजय कुमार
तब जीवन का छंद कविता बनता है
नारायण दत्त
मेरी पहली कहानी
अपना घर
अचला नागर
आलेख
अर्द्ध-पर्व का पूर्ण सत्य
हिमांशु जोशी
चले आते हैं, जाने कहां-कहां से
डॉ. देवव्रत जोशी
कालीन बनवाने से अच्छा है जूते ही खरीद लें
सीताराम गुप्त
तारकशी का तराना
जय कुमार पाठक
सिक्किम का राज्य पक्षी – चिलमे
डॉ. परशुराम शुक्ल
एक बच्चे की आखिरी ख्वाहिश
शकील अहमद
स्वर्ग से सुंदर है घर
ओमप्रकाश पोरवाल
मूवी कैमरा मेरी तीसरी आंख था
राधू करमाकर
क्योंकि वह मां है
लाजपतराय सभरवाल
अपने प्रयोजन से भटकी हुई शिक्षा
नंदकिशोर आचार्य
अदम्य संघर्ष की अनूठी दास्तान
डॉ. मंगला अनुजा
किताबें
अंतर्कथा एक आरती की
राधारमण त्रिपाठी
संजीवनी का सच क्या है?
डॉ. ओ.पी. जोशी व डॉ. जयश्री सिक्का
व्यंग्य
सबसे बड़ी खबर
राधेश्याम
धर्म
आपने आध्यात्मिक परिवार बनाया है?
आचार्य महाप्रज्ञ
भीजै दास कबीर
रामविलास जांगिड़
विनाश का आह्वान
देवेश सिंगी
यात्रा-कथा
कृतज्ञ हूं, यमुनोत्तरी का दरस-परस हुआ
कृष्णनाथ
अनुभूति
दुनिया आज भी सुंदर है…जीने योग्य!
मन्नू भंडारी
कहानियां
और कितनी दूर
शीला इंद्र
राजा का प्रश्न (लघुकथा)
ज़हीर कुरेशी
नन्ही बुलबुल
कमलेश बख्शी
आनंद (लघुकथा)
कमला प्रसाद चौरसिया
मातमपुरसी
अभिमन्यु अनत
अपराधी (लघुकथा)
सतीश उपाध्याय
ईश्वरनीति (लघुकथा)
ज्ञानदेव मुकेश
ज्ञान क्या है ?(बोधकथा)
नीरज भारद्वाज
कविताएं
देखना, एक दिन
शम्भु गुप्त
शब्द
वेद राही
कुछ दोहे ग्रीष्म के
इसाक ‘अश्क’
पारदर्शियों वाले दिन
नईम
चिड़िया
रामकुमार आत्रेय
समाचार
संस्कृति – समाचार
भवन के समाचार
उजाले के प्रति आस्था और विश्वास का यह स्वर वस्तुतः जीवन के प्रति उस लगाव की प्रतिध्वनि है, जो सांसों को परिभाषित भी करता है, और परिमार्जित भी. रात जब बहुत लम्बी हो जाती है तो भोर के उजाले के आने की आहट होने लगती है. कितनी भी लम्बी क्यों न हो, रात आखिर रात ही तो होती है. खत्म तो उसे होना ही है. पर जो अंधेरे आज जीवन पर आच्छादित होते लग रहे हैं, उनके खत्म होने की एक शर्त है. यह अंधेरे अज्ञान के भी हैं और उस प्रमाद के भी जिसके चलते हमने उन मूल्यों और आदर्शों की अनदेखी कर दी जो जीवन को सार्थक बनाते हैं. आचार्य तुलसी ने जीवन को अर्थ देनेवाले, इन्हीं मूल्यों, आदर्शों की स्थापना के लिए अणुव्रत के रूप में एक आंदोलन चलाया था. स्वतंत्रता प्राप्ति के संघर्ष की समाप्ति के साथ ही उस राजनैतिक स्वतंत्रता को एक नैतिक आधार देने की आवश्यकता को उन्होंने महसूसा.
कुलपति उवाच
यांत्रिक बनाती शिक्षा
के.एम. मुनशी
शब्द यात्रा
कोठी में कमरे
आनंद गहलोत
पहली सीढ़ी
दीवा जलाना कब मना है?
हरिवंशराय बच्चन
आवरण-कथा
सम्पादकीय
सभ्यता की बुनियाद हैं नैतिक मूल्य
कैलाशचंद्र पंत
परम्पराओं का मंथन गढ़ता है हर युग के मूल्य
विजय किशोर मानव
निर्विकल्प नैतिकता के साधक
आलोक भट्टाचार्य
उजाले में अंधेरों की तलाश के विरुद्ध अंधकार में दीपक
आचार्य महाश्रमण
मानवधर्म का प्रतीक अणुव्रत
आचार्य तुलसी
आध्यात्मिक आंदोलन
जयप्रकाश नारायण
अणुव्रत और मूल्यों की खोज
आचार्य महाप्रज्ञ
धारावाहिक आत्मकथा
सीधी चढ़ान (इक्कीसवीं किस्त)
कनैयालाल माणिकलाल मुनशी
नोबेल कथा
एक सपने की मौत
सीग्रिद उंडसेत
व्यंग्य
हिन्दी साहित्य में भ्रष्टाचार का योगदान
शशिकांत सिंह ‘शशि’
आलेख
हजारों रोशनियों का सपना
नंद चतुर्वेदी
रोशनी यहां है
राजकिशोर
ज्योति का गतिपथ
परिचय दास
हमें स्वयं को परिभाषित करना है
प्रो. रमेशचंद्र शाह
सार्थक लेखन का ईमानदार आग्रही
रमेश नैयर
गांधीगिरी मनुष्यता को संकटों से बचाएगी
धर्मपाल अकेला
दिव्य प्रवाह से अनंत तक
मैलविल डी मैलो
गुजरात का राजकीय पुष्प ः गेंदा
डॉ. परशुराम शुक्ल
तुम बिल्कुल हम जैसे निकले
वुसतुल्लाह खान
मन में आया था वह पुस्तक चुरा लूं…
अभिमन्यु अनत
किताबें
कहानियां
कभी न समाप्त होने वाली कहानी
यू. आर. अनंतमूर्ति
वसीयत
मालती जोशी
कविताएं
अणुव्रत गीत
सूर्यभानु गुप्त
दीवाली ने…
द्विजेंद्रनाथ सैगल
वर्षा के लिए…
संघमित्रा मिश्रा
ग़ज़ल
ज़हीर कुरेशी
समाचार
भवन समाचार
संस्कृति समाचार
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कुलपति उवाच
व्यक्तित्व का विकास
के.एम. मुनशी
शब्द यात्रा
ना यानी नहीं
आनंद गहलोत
पहली सीढ़ी
और एक मुस्कान
पॉल एलुआर
आवरण-कथा
सम्पादकीय
सवाल भाषाई आत्मसम्मान का
रघु ठाकुर
हिंदी में बात, हिंदी की बात
विकास मिश्र
भाषा का साम्राज्यवाद
न्गुगी वा थ्योंगो
हिंदी का आत्मसंघर्ष
निर्मल वर्मा
हिंदी लेखक होने की पहली पीड़ा
अभिमन्यु अनत
मैं हिंदी का लेखक हूं…
शरद जोशी
सच्ची भाषा को खोजना पड़ेगा
नर्मदा प्रसाद उपाध्याय
वह हिंदी से कभी रिटायर नहीं होंगे
पूर्णिमा पाटिल
कैसे हो समृद्ध भारतीय साहित्य…?
डॉ. राजम पिल्लै
अंग्रेज़ी बनाम हिंदी
मार्क टली
धारावाहिक आत्मकथा
सीधी चढ़ान (बीसवीं किस्त)
कनैयालाल माणिकलाल मुनशी
नोबेल कथा
जां क्रिस्तोफ
रोम्यां रोलां
व्यंग्य
थानेदार का न्याय
प्रदीप पंत
आलेख
कंटीली झाड़ियों में छिपे एक फूल…
विष्णु सखाराम खाण्डेकर
पंत-बच्चन के पत्रों के विवाद की अंतर्कथा
अजित कुमार
बरसों तक वह खत मां के पास बिना पढ़े पड़ा रहा था…
केशव प्रथमवीर
स्वीडन में उस ईरानी लड़के ने एक सवाल पूछा था
सुनील गंगोपाध्याय
‘सरस्वती’ में वही मसाला देता जिसमें पाठकों का लाभ समझता
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी
ऋषि बारान्निकोव
हिमांशु जोशी
दुनिया का सबसे तनहा लाइब्रेरियन
पी. साईनाथ
‘मेरा वह भक्त मुझे प्रिय है’
आचार्य महाश्रमण
‘मैं वही हूं, जिसे आपने चदरा…
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
किताबें
कहानियां
वेणु की डायरी (उपन्यास अंश)
सूर्यबाला
पॉवर कट
वंदना शुक्ल
कविताएं
ग़ज़ल
सूर्यभानु गुप्त
जनता वही कहार
रामनिवास ‘मानव
गज़ल
विज्ञान व्रत
समाचार
भवन समाचार
संस्कृति समाचार