हमें वोट दो जगवालो…

बच्चे लड़ते आपस में, नेता भिड़ते संसद में

बच्चे हिल-मिल फिर गाते, नेता दुश्मन बन जाते

नेताओं से तो अच्छे, हम छोटे-छोटे बच्चे

कथनी-करनी एक जैसी, अंदर-बाहर से सच्चे

हमें वोट दो जगवालो, हम सरकार बनायेंगे!

कर न सके अब तक नेता, वो करके दिखलायेंगे!!

हैं दुख-दर्द बहुत जग में,

भूख-प्यास-मजबूरी है.

इक-दूजे के बीच यहां,

जाने कितनी दूरी है.

जल्द दूर हो ये दूरी, ऐसा ढब अपनायेंगे!

छोटे-बड़े का अंतर हम, वादा रहा, मिटायेंगे!!

हमें वोट दो जगवालो…

हर बस्ती, हर गांव-गली,

मानव, मानव का दुश्मन.

काल पड़ा है पानी का,

और आग आंगन-आंगन.

हम तो भाईचारे का सावन बनकर छायेंगे!

बात लड़ाई-झगड़े की लोग भूल ही जायेंगे!!

हमें वोट दो जगवालो…

हर घर में इस देश के हम,

लायेंगे वो खुशहाली.

हर दिन होगा होली-सा,

और रात ज्यों दीवाली.

खिले फूल-सा हर चेहरा, ऐसा मौसम लायेंगे!

बापूजी का हर सपना हम साकार बनायेंगे!!

हमें वोट दो जगवालो…

–     सूर्यभानु गुप्त

                                           (जनवरी 2014)

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