सफलताओं का वर्ष

भवन परिवार के प्रिय सदस्य-गण, आप सबको मेरा अभिवादन एवं शुभकामनाएं.

पिछला वर्ष भारतीय विद्या भवन के इतिहास का सर्वाधिक घटना-प्रधान वर्ष रहा. यह वर्ष ‘भवन’ का अमृत महोत्सव वर्ष था और कुलपति मुनशी का 125 वां जन्मज-यंती वर्ष भी. ‘भवन’ के प्रत्येक केंद्र, संस्थान, इकाई एवं प्रभाग ने जनता तक पहुंचने एवं उन्हें ‘भवन’ से जोड़ने के लिए अनेक रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित किये. ऐसे आयोजन अभी भी चल रहे हैं और अगले वर्ष भी उत्सवों का यह आयोजन चलता रहेगा.

जब मैं विगत वर्ष पर दृष्टि डालता हूं तो कई तरह की भावनाएं मन में उठती हैं. ईश्वर के  प्रति आभार की भावना से मैं भर जाता हूं और एक विनम्रता का भाव मुझ पर छा जाता है. हम सब जानते हैं कि हमारा देश कितने कठिन एवं चुनौतीपूर्ण समय से गुज़र रहा है. हमारे नैतिक मूल्यों का घेराव हो रहा है. विश्वास, सत्य, प्यार, करुणा, विनम्रता, सेवा-भावना समेत वे सब मूल्य, जो हमारी संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत हमें सिखाती है, आज उन्हें दबाया जा रहा है. हमारे गणतंत्र के पितृ पुरुषों ने स्वतंत्रता, जनतंत्र, समन्वय, बंधुता एवं एकता की जो अवधारणा हमें दी थी, आज उसे खुलेआम चुनौती दी जा रही है. यह दैवीय अनुकम्पा एवं मार्ग-दर्शन का ही परिणाम है कि ऐसे समय में भी ‘भवन’ अपने निर्धारित पथ पर आगे बढ़ पा रहा है. इससे यह आशा बंधती है कि ऐसे बहुत से भले लोग हैं जो अवसर मिलने पर किसी निष्ठावान एवं स्वार्थ-रहित कार्य के लिए  सहायता देने हेतु तत्पर हैं. यह हमें विश्वास दिलाता है कि अंततः बुराई पर भलाई की विजय होगी.

इससे हमारा दायित्व भी दस गुना बढ़ गया है. ‘भवन’ के उद्देश्यों की पूर्ति के द्वारा देश की सेवा के लिए हमें पुनः शपथ लेनी होगी एवं स्वयं को पुनर्समर्पित करना होगा. मुनशीजी ने ‘भवन’ के मिशन को इन शब्दों में परिभाषित किया था- “पुनर्सृजन के प्रभावों को सामने लाना ताकि मानव-प्रकृति को बदलने वाला अदृश्य दबाव काम कर सके. यह अदृश्य दबाव ही ऐसा सम्भव कर सकता है.” इस दिशा में भवन तीन क्षेत्रों, संस्कृति, शिक्षा एवं समाज-सेवा, में सक्रिय है.

चूंकि अंतिम उद्देश्य मानव-प्रकृति को बदलना एवं हमारे देश के नागरिकों को ईमानदार तथा उत्तरदायी नागरिक बनाना है, इसलिए मेरा मानना है कि ‘भवन’ जो सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण काम कर रहा है, वह हमारे छात्रों में नैतिक मूल्यों की प्रतिष्ठा करना है, ताकि हमारी महान संस्कृति एवं आध्यात्मिक विरासत के संदेश के प्रति वे जागरूक हो सकें. पिछले छह वर्षों में हमने इस दिशा में अपने प्रयासों को मज़बूत किया है. हमारे छात्रों की संख्या लगभग दो लाख है. यदि हम अपने छात्रों में से 25 प्रतिशत को भी इस योग्य बना पाये तो ‘भवन’ देश को योग्य एवं गुणी भावी नागरिक दे पायेगा. इस दिशा में निष्ठावान एवं प्रभावी प्रयास किये गये हैं. पर मैं समझता हूं, अभी इस दिशा में बहुत कुछ करना बाकी है.

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आगे बढ़ने से पहले हमें एक गम्भीर औपचारिकता निभानी है. इस वर्ष जो सदस्य हमारे बीच नहीं रहे, हमें उन्हें श्रद्धांजलि देनी है. ‘भवन’ का परिवार बहुत बड़ा है, दुर्भाग्य से इस वर्ष हमारे कई सहयोगी नहीं रहे.

श्री बनवारीलाल पुरोहित के पिता एक महान दानशील व्यक्ति, ‘भवन’ के हितैषी श्री भगवानदास पुरोहित का इस वर्ष 19 नवंबर को नागपुर में निधन हो गया. 97 वर्षीय भगवानदासजी ‘भवन’ परिवार के वरिष्ठतम सदस्य थे. नागपुर में ‘भवन’ के चारों स्कूलों एवं कॉलेज ऑफ कम्युनिकेशन के नाम उन्हीं के नाम पर रखे गये हैं.

मेरे पूर्ववर्ती श्री प्रवीणचंद्र गांधी की धर्मपत्नी, श्रीमती हंसाबेन, ‘भवन’ के सैनिकपुरी केंद्र के निष्ठावान मानद सेक्रेटरी एवं डायरेक्टर, एयर कमाडोर भास्कर राव, हमारे राजेंद्र प्रसाद इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेशन एंड मैनेजमेंट के रजिस्ट्रार श्री पी. एन. वैद्यनाथन, जिन्होंने 52 वर्ष तक भवन की निष्ठपूर्ण सेवा की, बेंगलूरु केंद्र के मानद सेक्रेटरी श्री राघवन की पत्नी श्रीमती रमा एवं भवन के वालनचेरी केंद्र के चेयरमैन एवं केट्टकाल के प्रसिद्ध आर्य विद्यालय के प्रमुख डॉ. पी.के. वारियर के सुपुत्र डॉ. विजयन वारियर का भी इस वर्ष देहांत हो गया.

   भवन के अनेक सदस्यों ने ‘भवन’ को प्रतिष्ठा दी है. उनमें से कुछ हैं ः श्रीमती इला भट्ट एवं श्रीमती किशोरी अमोणकर, जिन्हें देश के दो सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हुए हैं- क्रमशः इंदिरा गांधी शांति, निशत्रीकरण एवं विकास सम्मान एवं प्रथम भीमसेन जोशी गौरव पुरस्कार. भवन के अमृतसर स्कूल की प्रिंसिपल डा.(श्रीमती) अनीता भल्ला एवं चेन्नई स्कूल की वाइस प्रिंसिपल श्रीमती गीता नंदकुमार को नेशनल अवार्ड फॉर बेस्ट टीचर का सर्वोत्कृष्ठ सम्मान प्राप्त हुआ है. भवन के कई छात्रों ने शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए प्रशंसा प्राप्त की है, अनेक स्कूल खेल-कूद के लिए चैंपियन घोषित हुए हैं और छात्रों को फुटबाल, हॉकी, स्केटिंग, तैराकी, टेनिस आदि में  राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है. हमारे कुछ स्कूलों ने राष्ट्रीय एकता शिविरों, अध्यात्मिक शिविरों आदि का आयोजन किया.

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गत वर्ष 30 दिसम्बर को भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी ने मुंबई में ‘भवन’ के अमृत महोत्सव के आयोजनों का उद्घाटन किया. इसके साथ ही ‘भवन’ के लगभग सभी केंद्रों, संस्थानों एवं इकाइयों द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का एक सिलसिला प्रारम्भ हो गया. नयी संस्थाएं तथा कार्यक्रमों की शुरुआत हुई. सारे भारत में सैकड़ों भव्य कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें राष्ट्रपति, लोकसभा की अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्रियों, राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों तथा जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े नेताओं ने भाग लिया. इनमें से कुछ महत्त्वपूर्ण आयोजन इस प्रकार हैंः

‘भवन’ के स्थापना दिवस, सात नवम्बर को भारत सरकार ने एक विशेष डाक टिकट जारी किया जिसमें ‘भवन’ की भव्य इमारत को दिखाया गया है. देश के संचार मंत्री श्री कपिल सिब्बल ने दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में यह डाक टिकट जारी किया. भुवनेश्वर, उड़ीसा में भवन के मैनेजमेंट कॉलेज के दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि मुंबई में ‘भवन’ के अमृत महोत्सव का शुभारंभ करने का अवसर मिलने के लिए वे स्वयं को भाग्यशाली मानते हैं. दूरदर्शन के अनेक चैनलों ने हमारे कुछ कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण किया. दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल ने अपने एक घंटे के ‘आज सवेरे’ कार्यक्रम में दो बार श्री दस्तूर का साक्षात्कार प्रसारित किया. दूरदर्शन के दिल्ली केंद्र तथा आकाशवाणी ने हमारे दिल्ली केंद्र के निदेशक श्री अशोक प्रधान का साक्षात्कार प्रसारित किया.

दिल्ली में ‘भवन’ के प्रांगण में, लोकसभा की अध्यक्ष श्रीमती मीरा कुमार ने मुनशीजी की प्रतिमा का अनावरण किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा, “भवन नाम ही हममें सम्मान का भाव जगाता है. इस महान संस्थान का संदर्भ आते ही हमारा हृदय गर्व  से भर जाता है.” हमारे अनेक केंद्रों में विभिन्न नेताओं ने मुनशीजी की प्रतिमाओं, अर्धप्रतिमाओं का अनावरण किया. उदाहरणार्थ- तिरुपति में राज्यपाल श्री नरसिंहन ने मुनशीजी की प्रतिमा का अनावरण किया. ‘भवन’ के कुछ संस्थानों एवं भवनों को मुनशी जी का नाम दिया गया. सारे भारत में अनेक विशेष भाषण, सेमिनार आदि आयोजित किये गये. मैं यहां दिल्ली में आयोजित डॉ. कर्णसिंह के भाषण का उल्लेख करना चाहूंगा. उनके भाषण का विषय था- ‘भारतीय विद्या भवन- आज और भविष्य में इसकी सार्थकता’. बेंगलूरू केंद्र में वैदिक अध्ययन पर सात दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया. कर्नाटक के राज्यपाल श्री एच.आर. भारद्वाज ने इसका उद्घाटन किया. सम्मेलन बहुत सफल रहा. भवन के इलाहाबाद भाखरी केंद्र ने ज्योतिष-विज्ञान का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया था जिसमें अनेक देशों के विद्वानों ने भाग लिया.

‘भवन’ के पुथुकोडे केंद्र ने विशेष बच्चों (मानसिक रूप से बाधित) के लिए एक स्कूल प्रारम्भ किया है, जिसका नाम है ‘भवन्स ज्योति’. हमारे अनेक केंद्रों ने समाज सेवा के क्षेत्र में अपनी गतिविधियों को प्रारम्भ किया, बढ़ाया है. इनमें विधवाओं के लिए अनाज  वितरण, गरीबों के लिए डाक्टरी सहायता, गरीब बच्चों के लिए शिक्षण आदि शामिल हैं. ‘भवन’ बड़ोदरा के निकट गोराज में प्रसिद्ध मुनि सेवा आश्रम के सहयोग से काम करने की योजना बना रहा है. यह आश्रम गरीबों में भी अति गरीबों के लिए स्कूल, अनाथालय, कृषि-क्षेत्र, पशु-चिकित्सालय, वृद्धाश्रम, कैंसर का आधुनिक अस्पताल, बहु-सुविधा सम्पन्न अस्पताल, मानसिक रूप से बाधित महिलाओं के लिए संस्थान, व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र आदि चला रहा है. श्री दस्तूर इस आश्रम की गतिविधियों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर आये हैं. हमें लगता है कि समाज-सेवा के क्षेत्र में ‘भवन’ की गतिविधियों को नये आयाम देने के लिए यह एक महत्त्वपूर्ण माध्यम बन सकता है.

इस वर्ष अनेक केंद्रों ने मंच-कलाओं की गतिविधियां प्रारम्भ की हैं. यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि शायद ही कोई दिन ऐसा जाता हो जब भवन के किसी न किसी संस्थान में कला, संगीत, नृत्य, नाटक आदि का कार्यक्रम न होता हो. मुंबई, चेन्नई, दिल्ली, बेंगलूरू समेत कई केंद्रों ने संगीत एवं नाटक के स्मणीय उत्सव आयोजित किये.

महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विषयों पर ‘भवन’ समय-समय पर अनूठे प्रकाशन करता रहा है. ‘सिंघी जैन सीरीज़’, ‘मनुस्मृति सीरीज, ‘कल्चरल रीडर्स’, ‘उपनिषद सीरीज़’ एवं ‘योगवशिष्ट सीरीज़’ के बाद अब हम प्रसिद्ध विद्वान डॉ. पी.सी. गौतम द्वारा रचित ‘न्यू ऋग्वेद संहिता’ का प्रकाशन कर रहे हैं.

‘भवन’ के स्कूलों का प्रदर्शन लगातार ‘शानदार’ की श्रेणी में रहा है तथा कक्षा दस एवं बारह के सीबीएससी  के परिणाम भी विशिष्ट रहे हैं. ‘भवन’ के कुछ कालेजों की गणना उच्चकोटि की संस्थाओं में होती है. हमारा एस.पी. जैन इंस्टीट्यूट एशिया के सर्वश्रेष्ठ बिज़नेस स्कूलों में गिना जाता है.

राजेंद्र प्रसाद इंस्टीट्यूट आफ मास कम्युनिकेशन एड मैनेजमेंट में अभी सुधार की गुंजाइश अवश्य है. मूल प्रश्न नये आधुनिक पाठ्यक्रमों का है. इस समस्या के समाधान के लिए हम किसी अधिकारी विशेषज्ञ की खोज में हैं. श्री मुरली देवड़ा के योग्य निर्देशन में हमारा गांधी-संस्थान गरीब बच्चों को निशुल्क कम्प्यूटर शिक्षा देने का काम लगातार कर रहा है. सारे भारत में अब इसके 54 केंद्र हैं.

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कार्यकारिणी समिति, ट्रस्टी मंडल, अध्यक्ष एवं कार्यकारी सचिव में विश्वास बनाये रखने के लिए मैं आप सबका आभारी हूं. आपके समर्थन एवं सहयोग के बिना हम पिछले सात वर्षों में विकास की सम्भवतः तीव्रतम गति प्राप्त करने एवं उसे बनाये रखने में सफल नहीं हो सकते थे.

फिर भी, मुझे अपनी पुरानी प्रार्थना दुहरानी ही होगी. कृपया ऐसे अपेक्षाकृत युवा व्यक्तियों के चयन में हमारी मदद कीजिए जो जीवन के बुनियादी मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध हों  एवं ‘भवन’ के वरिष्ठ पदों पर नियुक्त किये जा सकते हों. अच्छे स्वास्थ्य वाले पचास के दशक की आयु वाले व्यक्ति भी स्वीकार्य हैं. अब हम उन्हें किसी भी अन्य संस्थान के समकक्ष वेतन दे सकते हैं.

कृपया हमारी इस अति गम्भीर समस्या पर विचार करें तथा इस दिशा में कुछ प्रयास करें. यह सही है कि एक जैसी समझ वाले निष्ठावान एवं समर्पित व्यक्ति खोजना आसान नहीं है, पर इसीलिए हमें अपने प्रयास भी दुगने करने होंगे. यह एक गम्भीर चिंता का विषय है और श्री दस्तूर एक अर्से से इस बारे में सहायता की अपील करते रहे हैं.

मैं आश्वस्त हूं कि ईश्वर हमें सही राह दिखाएगा. उसने ‘भवन’ को अपना माध्यम बनाया है और देश के जीवन में एक निश्चित भूमिका निभाने एवं एक विशेष उद्देश्य पूरा करने का काम ‘भवन’ को सौंपा है. हम सब भाग्यशाली हैं कि हमें उसकी योजनाओं को पूरा करने में योगदान का अवसर मिला है. जब तक हमारा विश्वास उसमें बना रहेगा और हम अपने मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहेंगे, वह सही दिशा में हमारा मार्गदर्शन करता रहेगा.

धन्यवाद.

भवन की सेवा में आपका

     मुंबई                   

15 दिसंबर, 2013.   (सुरेंद्रलाल जी. मेहता)

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