विचरण करते पशु-पक्षी (भाग-2)

आनंद गहलोत

भारत में जो हालत प्राचीनतम ‘उक्षन्’ शब्द की हुई वही दूसरे प्राचीनतम ‘अश्व’(घोड़ा) की भी हुई. ईरानी भाषाओं में ‘अश्व’ थोड़ा-सा ध्वनि भेद होकर ‘अस्प’ रूप में आम बोलचाल का शब्द है. लेकिन भारत में जनसामान्य की भाषा का शब्द ‘घोड़ा’ है. संस्कृत के ‘घोटक’ शब्द से पालि-प्राकृत से होता हुआ ‘घोडग’, ‘घोडउ’, ‘घोड’, रूप बदल कर ‘घोड़ा’ बना. यूरोपीय शब्द ‘हॉर्स’ (घोड़ा) किस मूल शब्द से छलांग लगाकर बना, वहां के भाषाशात्री इससे अनजान हैं. मेरे विचार से संस्कृत के हेष् (हिनहिनाना) का हॉर्स से रक्त सम्बंध हो सकता है. संस्कृत में ‘हॉर्स’ के लिए ‘हेषिन्’ शब्द भी है. ‘संस्कृत में ‘घोड़ा’ के समानार्थी, पर्यायवाची शब्दों में एक प्रमुख शब्द है ‘अर्वन’. जैसे भारत का हिंदुस्तान नाम सिंधु नदी के नाम पर फ़ारसी की देन है वैसे ही इस्लाम की जन्मभूमि देश ‘अरब’ का नाम संस्कृत की देन है. भारतीय नरेश इस देश के घोड़ों को सबसे अच्छी नस्ल का मानते थे. उत्तम घोड़ोंवाला देश ‘अर्वन’ (घोड़ा) शब्द के आधार पर ‘अरब’ कहलाने लगा.

अरब देश का सबसे अधिक उपयोगी पशु है ‘ऊंट’. ‘ऊंट’ संस्कृत के ‘उष्ट्र’ शब्द के कुल में पैदा हुआ है. इसी ‘उष्ट्र’ से फ़ारसी में बना शब्द ‘उश्तुर’. ‘उश्तुर’ का अर्थ है ऊंट. बोलने में सुविधा के लिए ‘उश्तुर’ को छोटा कर ‘शुतुर’ भी कर दिया गया है. अफ्रीका का ‘शुतुर’ (ऊंट) जैसे बड़े डीलडौल का पक्षी इसी कारण ‘शुतुरमुर्ग’ कहलाने लगा.

संस्कृत का पशुवाचक ‘मृग’ फ़ारसी के पक्षीवाचक ‘मुर्ग’ में कैसे बदला, इसका अध्ययन काफ़ी रोचक सिद्ध हो सकता है. ऊंट के लिए एक बहुप्रचलित यूरोपीय शब्द है ‘केमॅल’. इसका मूल यूनानी का ‘जमल’ (ऊंट) शब्द से बना है. इस शब्द का गहन अध्ययन करने पर मेरा निष्कर्ष है कि अरब और हिब्रू का जमल और ऊंट अर्थ का संस्कृत शब्द ‘क्रेमल’ सजातीय, एक ही खानदान के शब्द हैं और ग्रीक शब्द ‘क्रेमलॉस’ संस्कृत शब्द के उतना ही निकट है जितना हिब्रू-अरबी शब्द के. किसी भी यूरोपीय विद्वान की नज़र ‘क्रेमल’ पर नहीं पड़ी. संस्कृत के ‘क्रेमल’ द्वारा अंग्रेज़ी तक आते-आते अपना ‘केमॅल’ रूप धारने तक उसकी कोई भी हड्डी ध्वनि की दृष्टि से टेढ़ीमेढ़ी नहीं हुई.

संस्कृत का शृगाल (हिंदी ‘सियार’) और ईरानी ‘सगाल’, अंग्रेज़ी ‘जैकाल’ भी एक ही मूल के शब्द हैं. संस्कृत के ‘मेष’ (भेड़, मेढ़ा) और फ़ारसी के ‘मेश’ दोनों का अर्थ एक ही है. चूहे के लिए संस्कृत शब्द है ‘मूषः’, ‘मूषकः’. क्या आपको नहीं लगता कि यूनानी का ‘मुस’ अंग्रेज़ी का ‘माउस’ संस्कृत के ‘मूषः’ के गोतीनाती हैं? अंग्रेज़ी के ‘मॉसक्विटो’ संस्कृत के ‘मशः’, ‘मशकः’ (मच्छर) में और फ़ारसी के ‘किर्म’, संस्कृत के ‘कृमि’ और अंग्रेज़ी के ‘जर्म्स’ में भी एक से ही विषाणु हैं.

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