नये साल पर

।।आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः।।

 सर्वेश्वरदयाल सक्सेना  >   

नये साल की शुभकामनाएं

खेतों की मेड़ों पर कूल भरे पांव को
कुहरे में लिपटे उस छोटे-से गांव को
नये साल की शुभकामनाएं

इस पकती रोटी को, बच्चों के शोर को
चौके की गुनगुन को, चूल्हे की भोर को
नये साल की शुभकामनाएं

इस चलती आंधी में हर बिखरे बाल को
सिगरेट की लाशों पर फूलों से खयाल को
नये साल की शुभकामनाएं

कोट के गुलाब और जूड़े के फूल को
हर नन्हीं याद को, हर छोटी भूल को
नये साल की शुभकामनाएं

उनको जिनने चुन-चुन ग्रीटिंग कार्ड लिखे
उनको जो अपने गमले में चुपचाप दिखे
नये साल की शुभकामनाएं

(जनवरी 2014)

2 comments for “नये साल पर

  1. S. M. CHOUDHARY
    June 3, 2018 at 1:25 pm

    Good very good

  2. January 25, 2020 at 4:26 am

    वर्ष 1966 से लगभग 30 वषों तक अद्वतीय हिन्दी मासिक पत्रिका ” नवनीत ” का नियमित पाठक रहा हूं । मेरा जीवन ” नवनीत ” की रचनाओं से प्रभावित रहा है ।
    कामना है कि ” नवनीत “सदैव संस्कारित समाज की रचना करती रहे ।
    – ‌‌‌ मेघराज सिंह

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