किटी हाक में मेरा कैमरा

⇐  ह्यू गो पी. कुक  ⇒  

     ‘ह्यूगो, तुम्हारे लिए एक काम है’, मर्फी ने रहस्यपूर्ण दृष्टि से मेरी और देखते हुए कहा. उसकी इस बात से मैं कल्पना कर सकता था कि काम क्या होगा- वह किसी उत्सव की अथवा भाषण देते हुए किसी राजनीतिज्ञ की आकर्षक तस्वीरें खिंचवाना चाहता होगा.

    अमरिकी प्रेस एसोसिएशन के शिकागो दफ्तर में मैं सबसे कम उम्र का फोटोग्राफर था. इसलिए इससे अधिक और अपेक्षा भी क्या कर सकता था! परंतु उस समय मैंने यह सोचा भी न था कि 20 वर्ष की छोटी उम्र में किया हुआ यह कार्य सिद्ध होगा.

    मर्फी ने मुझे बताया कि राइट बंधु कोई बड़ी पतंग उड़ायेंगे और एक  भाइ स्वयं उसमें बैठकर उड़ेगा. वह चाहता था कि मैं इस दृश्य की आकर्षक और सुंदर तस्वीरें खींचूं. यह उड़ान उत्तरी कैरोलिना के किटीहाक नामक समुद्र-तट पर होनी थी.

    एक लम्बे टेढ़े-मेढ़े रास्ते को तै करके जब वहां पहुंचकर मैंने उन पतंगबाजों के बारे में पूछताछ की, तो एक मछुए ने दूर रेतीले मैदान की ओर इशारा कर दिया. मैं अपना ग्रेल्फैक्स कैमरा कंधे पर डाल और सूटकेस उठाकर उस रेतीले मैदान में लगभग आधा मील चला. वहां एक बिना लिपि-पुती इमारत ढांचे की तरह खड़ी थी और पास ही रेत पर आग जल रही थी. अलाव के गिर्द चार पत्रकार सिमटे-से बैठे थे. हम सबका एक ही प्रयोजन था-राइट बंधुओं की उड़ान की रिपोर्ट और चित्र उतारना.

    दूसरे दिन प्रातः मैं विलबर और आरविल राइट से मिला. उन्हें अपनी योजना के बारे में पूरा ज्ञान था और उन्होंने कोई शेखी नहीं बघारी.

    थोड़ी ही दूर पर राइट बंधुओं ने भारी तख्तों का लभगभ 60 फुट लंबा रनवे बनाया था. रनवे के बीच में लोहे की एक इकहरी पटरी बिछी हुई थी. पहले दिन तो राइट बंधु इस रनवे को समतल करने में ही व्यस्त रहे. दूसरे दिन उन्होंने मशीन के इंजन की जांच-पड़ताल की. मैंने उनका यह आविष्कार पहली बार देखा था.

    विचित्र प्रकार की इस पतंग में वार्निश किये मसलिन के 40 फुट लम्बे पंख लगे थे. लेकिन यह पतंग नहीं थी. इसमें एक भारी तथा बेहद शोर मचाने और धुंआ छोड़ने वाला इंजन लगा था. यह साइकल की लम्बी जंजीरों के फंदों से लकड़ी के दो पंखों से जुड़ा था.

    17 दिसंबर की सुबह बहुत सर्द थी. समुद्र से उठती कच्ची ठंडी-तूफानी हवा ने वातावरण को बर्फीला कर दिया था और उंगलियां जमी जा रही थीं. राइट बंधुओं ने हमारी सहायता से मशीन को पटरी पर चढ़ाया. मशीन में स्लेज गाड़ी की तरह नीचे पहिये लगे थे और यह एक विशेष ट्राली पर रखी हुई थी. फिर इसे ट्राली पर से रनवे पर उतारा गया. इंजन गर्म हो जाने पर विलबर और आरविल ने आखिरी बार मशीन को परखा.

    आरविल अंदर जा बैठा. उड़ान का क्षण आ पहुंचा. पत्रकारों और विलबर ने धक्का लगाया, ताकि इंजन पूरी रफ्तार से दौड़ सके. मैं इस कार्य में उन लोगों की मदद नहीं कर सका. मैं तो इस समय दूर एक कोने में कैमरे का फोकस ठीक करने में व्यस्त था.

    पतंग रनवे पर दौड़ रही थी. उसके पीछे रेत का बादल और नीला धुंआ उठ रहा था. एकाएक उसने गति पकड़ी और उड़ चली. तुरंत तस्वीर खींची- यह पहली तस्वीर थी. उस घटना की पहली तस्वीर, जब हवाई जहाज किसी इंसान को लेकर धरती के ऊपर पहली बार उड़ा था.

    हवाई जहाज एक नगर के ऊपर उड़ा. उड़ान बहुत लम्बी नहीं थी, फिर भी काफी लम्बी थी. मैं जल्दी से न्यूयार्क के लिए भागा, ताकि तस्वीरें तैयार कर सकूं. अनेक समाचार-पत्र उनके लिए लालायित थे. लेकिन उस समय हवाई जहाज के उज्जल भविष्य की कल्पना किसी को न थी, सभी सम्पादक उसे राइट बंधुओं की सनक समझ रहे थे.

( फरवरी 1971 )

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