उड़ान

चीनी कहानी

♦   मो यान    >

आकाश एवं धरती को प्रणाम कर चुकने के पश्चात, स्थूलकाय एवं श्यामवर्णी हुंग शी अंततः जब खाली हुआ तो अपनी उत्तेजना पर काबू नहीं रख पा रहा था. घूंघट में होने के कारण अपनी नयी नवेली दुल्हन का मुख तो उसने नहीं देखा था, लेकिन उसकी लम्बी सुडौल बांहों एवं पतली कमर से उसने यह अंदाज़ा लगा लिया था कि वह उत्तरी च्याओचौ कस्बे की ज्यादातर लड़कियों की अपेक्षा अधिक सुंदर होगी. बेहतर चेचक दाग वाला, चालीस वर्षीय हुंग शी उत्तरपूर्वी काओमी कस्बे के सर्वाधिक जाने-पहचाने क्वांरों में एक था. उसकी बुढ़ाती मां ने हाल ही में यानयान से उसका विवाह तय किया था और इसके बदले में उत्तर पूर्वी काओमी की वास्तविक सुंदरियों में एक उसकी बहन यांगह्वा का विवाह यानयान के गूंगे बड़े भाई से हुआ था. अपनी बहन के बलिदान से कहीं गहरे प्रभावित हुंग शी के मन में सहसा यह बात कौंधी कि वह उस गूंगे के बच्चे जनेगी और अपनी इस भ्रमित भावनात्मक स्थिति में उसमें अपनी दुल्हन के प्रति एक बैरभाव-सा जाग उठा. ‘गूंगे, यदि तूने मेरी छोटी बहन को तंग किया तो मैं इसे तेरी बहन पर उतारूंगा,’ उसने मन ही मन कहा.

दोपहर चढ़ आयी थी जब हुंग शी की नयी पत्नी ने सुहाग-कक्ष में प्रवेश किया. ईंटों से बने बिस्तर के किनारे बैठी दुल्हन को झांक-झांक कर देखने के लिए शैतान बच्चों के एक झुंड ने खिड़की को ढकने के लिए लगे गुलाबी कागज़ में छेद कर दिया था. पड़ोस की एक औरत ने हुंग शी का कंधा थपथपाया और दबी हंसी के साथ बोली, “चेचकदागी! तुम एक खुशकिस्मत आदमी हो! तुम्हें जो मिली है वह कमल की एक छोटी मासूम कली है, इसलिए उसके साथ आहिस्ता से पेश आना.” अपनी पतलून की सिलाई से खेलते हुए हुंग शी के होंठों पर हल्की-सी रहस्यमय हंसी खेल गयी और उसके चेहरे के दाग उत्तप्त हो लाल हो उठे. वह रात्रि के घिर आने की प्रतीक्षा में अहाते में आगे-पीछे चहल कदमी करने लगा. सूर्य आकाश में गतिहीन-सा टंगा हुआ था. तभी उसकी मां अपना बेंत लिये लंगड़ाते हुए आयी और बोली, “शी, नयी बहू का हाव-भाव मुझे ठीक नहीं लग रहा है. सावधान रहना, कहीं वह भाग न जाय.”

“चिंता मत करो, मां, यांगह्वा के वहां रहते हुए यह कहीं नहीं जा सकती. वे एक धागे से बंधी हुई दो टिड्डियों की तरह हैं. एक दूसरे के बिना भाग नहीं सकतीं.” अभी मां-बेटे यह बात कर ही रहे थे कि नयी बहू दो सहेलियों के साथ सुहाग-कक्ष से निकल कर बाहर अहाते में चली आयी. हुंग शी की मां नाराज़गी में भुनभुनायी, “किसी दुल्हन को अंधेरा होने से पहले पलंग से उठकर हाजत के लिए जाते हुए कभी सुना है क्या? इसी से लगता है कि यह शादी चलेगी नहीं. मेरा ख्याल है कि वह कुछ करने वाली है.” किंतु हुंग शी अपनी पत्नी की सुंदरता की कल्पना में इतना लीन था कि वह अपनी मां की चिंताकुलता का भागीदार नहीं हो सका.

यानयान का चेहरा लम्बा था- भौंहें बारीक, नाक लम्बी और फीनिक्स-तिरछी आंखें. किंतु जब उसने हुंग शी का चेहरा देखा तो वह स्तब्ध हो रुक गयी. एक लम्बी  चुप्पी के उपरांत उसके मुख से एक कठोर और कर्कश चीख निकली और वह बाहर की ओर दौड़ पड़ी. उसकी सहेलियों ने आगे बढ़कर उसकी बांहों को पकड़ने की कोशिश की जिससे उसका लाल गाउन चिर कर फट गया और उसकी बाहुओं की हिम-सी श्वेत त्वचा, उसकी पतली ग्रीवा और नीचे पहनी हुई लाल शमीज़ का अग्र भाग झलक उठे. हुंग शी किंकर्त्तव्यविमूढ़ हो गया. तभी अपने बेंत से उसके सिर पर टप-टप करते हुए उसकी मां चीखी, “उसके पीछे भागो, मूर्ख!” इस बात से हुंग शी सचेत हो डगमगाते हुए कदमों से उसके पीछे दौड़ने लगा जब कि यानयान एक चिड़िया की पूंछ के सदृश अपने मुक्त केशों का अनुचिह्न छोड़ते हुए सड़क पर उड़ चली.

“उसे रोको,” हुंग शी चीखा, “उसे रोको!” उस की चीख-पुकार से झुंड गांव वाले अपने घरों से बाहर निकल कर सड़क पर आ गये और साथ ही एक दर्जन से अधिक बड़े खूंखार कुत्ते बुरी तरह भूंकने लगे. यानयान एक गली में मुड़कर दक्षिण दिशा में खेतों की तरफ चल पड़ी जहां गेहूं के डंठल हवा में झुके हुए लहरा रहे थे और उनकी फूली हुई बालियां हरियाली के समुंदर में लहरों की मानिंद गोते लगा रही थीं. यानयान गेहूं की कमर तक ऊंची लहरों में तेज़ी से घुसी तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो हरियाली और उसकी लाल शमीज तथा दूधिया बांहों के सम्मिश्रण से एक खूबसूरत गतिमान रंगीन चित्र उभर उठा हो.

किसी नयी दुल्हन का भाग जाना पूरे उत्तर-पूर्वी काओमी कस्बे के लिए शर्म की बात थी. गांव वाले इस कारण प्रतिशोध की भावना के वशीभूत हो उसका पीछा करते हुए चारों ओर से उसे घेरने का प्रयास करने लगे. कुत्ते भी हरियाली की लहरों में लपके एवं धमा-चौकड़ी मचाने लगे. जब लोगों का घेरा कसने लगा तो यानयान अचानक सामने की ओर कूदी और गेहूं की लहरों में गायब हो गयी. हुंग शी ने चैन की सांस ली. पीछा करने वालों की गति धीमी पड़ गयी और वे हांफने लगे. एक दूसरे का हाथ पकड़े बड़ी सावधानी से वे अब इस प्रकार आगे बढ़ने लगे मानों कोई मछुवारा अपना जाल समेट रहा हो.

इस वक्त हुंग शी के हृदय पर क्रोध कुछ इस कदर हावी हो गया था कि वह बस यही सोचे जा रहा था कि एक बार यानयान उसकी पकड़ में आ भर जाय तो वह उसको कितना पीटेगा.

सहसा गेहूं के खेतों से एक लाल रोशनी ऊपर आकाश में उठी जिससे नीचे खड़ी सारी भीड़ आश्चर्यचकित एवं भ्रमित हो गयी. पर तभी लोगों ने देखा कि यह तो लाल गाउन-शमीज़ में यानयान है जो अपने पैरों को साथ समेटे और बांहों को हवा में फड़फड़ाते हुए घेराबंदी से दूर भव्यता से एक सुंदर तितली के सदृश ऊपर हवा में उठ रही थी. जब वह अपनी बांहें फड़फड़ाते हुए उनके ऊपर मंडरा रही थी तो लोग माटी के बुत सरीखे हो गये और उसे मुंह फाड़कर आश्चर्य से देखने लगे. और फिर वह धीमे से उड़ चली. इस समय यदि लोग उसका पीछा करते तो उसकी छाया पर पैर रखते चले जाते. उनके सिरों से मात्र छः या सात मीटर ऊपर उड़ती यानयान अत्यंत खूबसूरत लग रही थी. उत्तरपूर्वी काओमी कस्बे में वह हर अजीबोगरीब बात, जो आप सोच सकते हैं, घट चुकी थी, किंतु यह पहली बार हो रहा था कि एक औरत आकाश में उड़ रही थी.

सदमें से एक बार उबर जाने के बाद खड़ी भीड़ ने पुनः यानयान का पीछा करना प्रारम्भ कर दिया. कुछ लोग दौड़े-दौड़े घर गये एवं उसका पीछा करने हेतु साइकिलों पर लौटे, इस बात की प्रतीक्षा में कि कब वह ज़मीन पर उतरे और वे उसे झपट कर पकड़ लें. खेतों में चारों तरफ फैले लोगों की चीख-पुकार के बीच उड़ती हुई यानयान और नीचे पीछा करने वालों ने भागने और पकड़ने का नाटक जम कर खेला. अपनी गरदनें टेढ़ी कर आकाश में इस विचित्र घटना को देखने हेतु कस्बे के बाहरी लोग भी राहगीरों के साथ हो लिये. जहां उड़ती हुई औरत अपनी भव्यता से वशीकरण का जादू चला रही थी, वहीं नीचे उसका पीछा करने वालों को दौड़ते हुए रह-रह कर नज़रें ऊपर उठानी पड़ रही थीं जिसके परिणामस्वरूप वे हार कर भागती हुई सेना की तरह ऊबड़-खाबड़ खेतों में लड़खड़ा कर गिरते-पड़ते एक-दूसरे से भिड़ जाते थे. अंत में यानयान कस्बे के उत्तरी कोने पर स्थित पुराने कब्रिस्तान के चारों तरफ फैले चीड़ के कुंज में पहुंच गयी. करीब एक एकड़ में फैले काले चीड़ के वृक्ष उन सैकड़ों टीलों की पहरेदारी कर रहे थे जिनके नीचे उत्तरपूर्वी काओमी पूर्वज चिर निद्रा में सोये पड़े थे. सीधे और लम्बे खड़े सारे के सारे वृक्ष बहुत पुराने हो चुके थे और उनकी चोटियां आकाश से नीचे उतर आये बादलों को भेद रही थीं. बूढ़ा कब्रिस्तान एवं काले चीड़ का कुंज कस्बे के सर्वाधिक पवित्र ही नहीं डरावने स्थल भी थे. पवित्र इसलिए क्योंकि वह कस्बे के पूर्वजों की आरामगाह थी; डरावने वहां घटी तमाम भूतिया घटनाओं के कारण.

कब्रिस्तान के बिल्कुल बीचों-बीच सब से लम्बे एवं सबसे पुराने चीड़ के वृक्ष की चोटी पर यानयान आहिस्ता से बैठ गयी. हालांकि वजन में वह 50 किलो से ज्यादा ही होगी किंतु पेड़ की सब से ऊंची-पतली शाखाओं ने उसे अपनी गोदी में जिस आसानी से सम्भाल लिया वह उन सबके लिए, जो उसका पीछा करते हुए वहां पहुंच कर खड़े हो गये थे एवं नीचे से उसे देख रहे थे, एक आश्चर्य की बात थी. तभी एक दर्जन से भी अधिक कुत्ते भी यानयान की तरफ अपना सिर उठा भूंकने लगे मानों वे भी अचम्भे में हों.

हुंग शी चिल्लाया, “नीचे आओ, इसी क्षण वहां से नीचे आओ.”

कुत्तों की भों भों और हुंग शी की चीख बहरे कानों पर पड़ी. हवा के हर झोंके के साथ हिलती-डुलती यानयान अन्यमनस्क वहीं बैठी रही. नीचे खड़ी भीड़ बेचारगी से जल्दी ही थक गयी सिवाय चंद उत्साही बच्चों के जो चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे थे “नयी दुल्हन, ओ नयी दुल्हन, तनिक और उड़ कर दिखाओ.” तभी यानयान ने अपनी बांहें उठायीं. “उड़ो,” बच्चे चिल्लाए “उड़ो! देखो, वह उड़ने जा रही है.” किंतु वह नहीं उड़ी. बजाय इसके उसने अपनी पतली-लम्बी उंगलियां अपने बालों पर कुछ इस तरह से फेरीं मानो कोई चिड़िया अपने पंख झाड़
रही हो.

हुंग शी घुटनों के बल बैठ कर विलाप करने लगा, “चाचुओ, भाइयो और कस्बाई साथियो! उसे नीचे उतारने हेतु रास्ता निकालने में मेरी मदद करो. आप सबको पता है कि मेरा विवाह कितनी मुश्किल से  हुआ है!”

तभी एक गधे पर सवार हुंग शी की मां को वहां लाया गया जो दर्द से कराहते हुए गधे की पीठ पर से फिसलती हुई लड़खड़ा कर ज़मीन पर उतरी.

“वह कहां है?” बुढ़िया ने हुंग शी से पूछा. “वह है कहां?”

हुंग शी ने वृक्ष की चोटी की ओर इशारा करते हुए जवाब दिया, “वह वहां है.”

अपनी आंखों के ऊपर हाथों से पर्दा करते हुए बुढ़िया ने उस तरफ देखा जहां उसकी पुत्र-वधु ने पेड़ की चोटी पर शरण ली थी और क्रोध से चीख पड़ी, “राक्षसी, वह एक राक्षसी है!”

“बड़े भइया,” बुढ़िया लोहा पहाड़ की ओर मुखाबित हो कर बोली, “मेरी विनती है कि अब इस मामले को तुम सुलझाओ.” इसके उत्तर में लोहा पहाड़ ने कहा, “हम लोग सबसे पहले तो किसी को उत्तर च्याओचौ कस्बे में यानयान की मां, उसके भाई और यांगह्वा को यहां लाने के लिए भेज देते हैं. यदि तब भी वह नीचे नहीं उतरती तो हम यांगह्वा को यहीं रख लेंगे और उसे वापस नहीं जाने देंगे. दूसरी तरफ, हम कुछ लोगों को धनुष-बाण बनाने एवं थोड़े से लम्बे बांस काट लेने हेतु घर भेज देते हैं. यदि कोई भी तरकीब काम नहीं करती तो हम लोग टेढ़ी उंगली से घी निकालेंगे. हम स्थानीय सरकार को भी इस बात की खबर कर देंगे. चूंकि वह और हुंग शी पति-पत्नी हैं, सरकार अवश्य ही विवाह कानूनों के पक्ष में दखल देगी. तो ठीक है. हुंग शी, तुम यहां बैठकर पेड़ की चोटी पर नज़र रखो. हम लोग किसी आदमी से एक घंटा तुम्हारे पास भिजवा देंगे. यदि कोई बात हो तो अपनी पूरी ताकत से उसे बजा देना. जिस प्रकार से वह हरकत कर रही है, मेरा पक्का विश्वास है कि उस पर कोई सवार है. हमें कस्बे में वापस जा कर एक कुत्ते को मारना पड़ेगा जिससे ज़रूरत पड़ने पर कुत्ते का खून उपलब्ध रहे.” थोड़ी देर में भीड़ छंट गयी और सब तैयारी करने के लिए वापस चले गये. हुंग शी की मां ने अपने बेटे के साथ रुकने की ज़िद की किंतु लोहा पहाड़ ने मना कर दिया और उसे समझाते हुए बोला, “बेवकूफी की बात मत करो. तुम्हारे यहां ठरहने से क्या हासिल होगा? मान लो कोई बात हो जाती है तो तुम तो भाग भी न पाओगी. घर जाओ.” यह देखकर कि बहस करना बेकार है, बुढ़िया ने अपने को गधे की पीठ पर सहारा दे कर बैठा देने दिया और घटना-स्थल से रोते-बिलखते हुए चली गयी.

अब जब कि शोर-शराबा शांत हो गया था, हुंग शी को जिसे उत्तरपूर्वी काओमी कस्बे के सबसे बहादुर लोगों में जाना जाता था, यह शांति विचलित करने वाली प्रतीत हुई. जैसे ही सूर्य पश्चिम में अस्त हुआ, हवाएं पेड़ों के मध्य विलाप करती-सी सनसनाने लगीं. अपना सिर झुका कर हुंग शी अपनी दुखती गर्दन को सहलाता हुआ पास में पड़े एक पत्थर पर बैठ गया. वह एक सिगरेट सुलगा ही रहा था कि ऊपर से एक भयानक हंसी सुनाई दी. उस  के रोंये खड़े हो गये और उसे बुरी तरह से डर लगने लगा. वह जल्दी से माचिस बुझा कर उठ खड़ा हुआ और कुछ कदम पीछे हट कर ऊपर पेड़ की चोटी की तरफ देखते हुए बोला, “मुझसे कोई चालबाज़ी न करना. बस मैं तुम्हें पकड़ भर लूं तो देखना.”

डूबते सूरज की लाली में यानयान की लाल शमीज़ आग के शोले जैसी लग रही थी. उसके अक्स से उसका चेहरा दीप्त हो रहा था. इस बात का कोई संकेत नहीं था कि वह भयानक हंसी उसी की थी. तभी अपने घोंसलों को लौटते कौवों का एक झुंड, जिसकी विष्ठा बारिश-सी गिर रही थी, हुंग शी के बिलकुल पास से उड़ गया. बीट की कई गर्म बूंदें बिलकुल उसके सिर पर गिरीं. वितृष्णा से उसने ज़मीन पर थूका और उसे लगा कि दुर्भाग्य का साया उस पर सवार हो गया है. पेड़ की चोटी अभी भी रोशनी से दमक रही थी, हालांकि चीड़-कुंज में अंधेरा घना होने लगा था. वृक्षों में और उनके चारों तरफ अब चमगादड़ों ने द्रुत गति से उड़ना शुरू कर दिया और कब्रिस्तान में लोमड़ियां भूंकने लगी. हुंग शी पुनः भयभीत हो गया.

हुंग शी के कानों में नाना प्रकार की ध्वनियां गूंज रही थीं. उसे ऐसा आभास हुआ कि कुंज में सर्वत्र आत्माओं का वास है. वह भयानक हंसी जो उसने कुछ देर पूर्व सुनी थी, अब रह-रह कर सुनाई देने लगी और उसके हर कहकहे से वह पसीने में तर-बतर होने लगा. उसे याद आया कि अपनी मध्यमा उंगली के सिरे को दांतों तले चबाना बुरी आत्माओं को भगाने का सबसे अच्छा तरीका होता है और उसने वैसा ही किया. उंगली में हुए तेज़ दर्द ने उसके दिमाग के जालों को साफ़ कर दिया. उसे लगा कि चीड़-कुंज में उतना अंधेरा तो नहीं है जितना कुछ क्षण पहले प्रतीत हो रहा था. कब्रों के टीलों की कतारें और उन पर लगे हुए पत्थर दिखने लगे. सूर्य के प्रकाश की धीमी होती किरणों से रंजित पेड़ों के तने भी उसे साफ़ दिखने लगे. उसने ऊपर आकाश की ओर देखा तो पाया कि यानयान वहां से हिली नहीं थी और उसके ऊपर कौवे मंडरा रहे थे. नीचे दांत काढ़े उसकी उपस्थिति का बारम्बार इकबाल करती हुई-झंखाड़ में दुबकी अपनी मांओं की निगरानी में कुछ अल्पवयस्क लोमड़ियां कब्रों के टीलों के बीच उछल-कूद कर रही थीं.

तभी एक कमज़ोर-सा छोटा बच्चा दो पेड़ों के बीच से नमूदार हुआ और उसने हुंग शी को एक घंटा, मुंगरी, कुल्हाड़ी और खाने की एक पोटली दी जिसमें एक बड़ी चपटी रोटी थी. लड़के ने उसे बताया कि लोहा पहाड़ की देख-रेख में धनुष-बाण बनाया जा रहा था, लोगों को च्याओचौ भेज दिया गया था और बस्ती के नेताओं ने इस घटना को बहुत गम्भीरता से लिया था और यह भी कि वे शीघ्र ही किसी को यहां भेजेंगे. चपटी रोटी हुंग शी की भूख मिटाने हेतु थी और उसे अपनी निगरानी जारी रखनी थी. यदि कोई बात हो जाय तो वह घंटा बजा कर खबर कर दे.

छोटे बच्चे के चले जाने के बाद हुंग शी ने घंटे को एक कब्र पर लगे स्मारक पत्थर पर रख दिया, कुल्हाड़ी को अपनी पेटी में खोंसा और रोटी खाने लगा. खाना खा चुकने के तत्काल बाद उसने कुल्हाड़ी निकाली और चिल्ला कर यानयान को संबोधित करते हुए बोला, “तुम नीचे आ रही हो या नहीं? यदि नहीं तो मैं इस पेड़ को गिरा दूंगा.” यानयान ने कोई उत्तर नहीं दिया. इस पर हुंग शी ने अपनी कुल्हाड़ी पेड़ के तने में इतनी ज़ोर से दे मारी कि पेड़ हिल गया. यानयान ने फिर भी कोई उत्तर नहीं दिया. उसने कुल्हाड़ी पेड़ के तने से बाहर खींचनी चाही किंतु बहुत गहरे घुस जाने के कारण वह उसे बाहर नहीं निकाल सका.

“कहीं वह मर तो नहीं गयी?” हुंग शी घबड़ाया.

उसने पेटी अपनी कमर में कस कर बांधी और अपने जूते उतार कर पेड़ पर चढ़ने लगा. पेड़ का तना खुरदरा होने के कारण उस पर चढ़ना आसान था. जब वह पेड़ पर करीब आधा चढ़ चुका तो ऊपर देखने हेतु रुका. उस जगह से उसे डाल पर बैठी यानयान के नितंब और उसकी झूलती हुई टांगें ही दिखीं. गुस्से में उसने सोचा कि इस समय तक तो हम साथ बिस्तर में होते किंतु इसकी जगह तुमने मुझे पेड़ पर चढ़ने को मजबूर कर दिया है. उसका क्रोध जैसे उसकी शक्ति  बन गया. उत्तरोत्तर पतले होते गये तने की बढ़ती शाखाओं-प्रशाखाओं पर पैर रख कर आसानी से वह ऊपर पहुंच गया. पेड़  की एक डाल पर उसने अपने पैर जमा कर यानयान को धर पकड़ने के लिए चुपके से हाथ बढ़ाया. उसके पैर के तलवे को उसने बस छुआ ही था कि उसे एक लम्बी आह और ऊपर की शाखाओं में खड़खड़ाहट का मिला-जुला स्वर सुनाई दिया. छलांग भरती कार्प मछली की सुनहरी शक्लों की तरह सोने के गोले हवा में उड़ चले. अपनी बांहें फड़फड़ाती हुई यानयान दोनों हाथों और पैरों से गतिशील हो हवा में उड़ते अपने केश लिये दूसरे पेड़ की चोटी पर सरक गयी. यह देख कर कि गेहूं के खेतों से निकलने के बाद यानयान के उड़ने की काबिलीयत ज़ाहिर तौर पर बेहतर हो गयी थी, हुंग शी के कान खड़े हो गये. नये पेड़ की चोटी पर वह उसी प्रकार बैठ गयी जैसे पहले पर बैठी थी. गुलाबी सूर्यास्त की ओर मुख किये वह उतनी ही आकर्षक लग रही थी जितना कि एक सद्यः प्रस्फुटित गुलाब.

“यानयान,” हुंग शी ने रुआंसे स्वर में पुकारा, “मेरी प्यारी पत्नी, घर चलो और मेरे साथ ज़िंदगी की शुरूआत करो. लेकिन यदि तुमने ऐसा नहीं किया तो मैं यांगह्वा को तुम्हारे गूंगे भाई की अंकशायिनी नहीं  बनने दूंगा.”

उसकी पुकार का स्वर अभी हवा में ही था कि उसने अपने पैरों तले घबड़ा देने वाली चटचट की आवाज़ सुनी. पेड़ की जिस शाखा पर वह खड़ा था, टूट गयी  और गोश्त के टुकड़े-सा वह ज़मीन पर धड़ाम से आ गिरा. सड़ती हुई चीड़ की सुई-सी नुकीली पत्तियों की कालीन पर से उठ कर तने का सहारा लेने और दो आज़माइशी कदम उठा अपने पैरों पर खड़े होने के पूर्व वह वहां काफी देर तक पड़ा रहा. सिवाय टूटन और दर्द के, जो कि लाज़िमी था, उसे ठीक लग रहा था- उसकी कोई हड्डी नहीं टूटी थी. उसने ऊपर आकाश की ओर देखा तो उसे चांद दिखा जिसकी पनियल किरणें चीड़ की शाखाओं से छन-छन कर नीचे कहीं किसी कब्र के टीले के एक हिस्से पर तो कहीं कब्र के ऊपर लगे एक पत्थर के कोने पर तो कहीं कोई के यूं ही पड़े किसी अंबार पर पड़ रही थीं. ऊपर पेड़ की चोटी पर बैठी एक बड़ी और खूबसूरत चिड़िया की मानिंद यानयान चांदनी में नहायी बैठी थी.

चीड़-कुंज के उस पार किसी ने हुंग शी का नाम लेकर पुकारा. उसने चिल्ला कर जवाब दिया. उसी क्षण उसे कब्र के स्मारक पत्थर पर रखे घंटे की याद आ गयी. उस ने घंटा उठा लिया किंतु उसे बजाने हेतु मुंगरी उसे कहीं नहीं दिखी. तभी लालटेन, टॉर्च और फ्लैशलाइट से लैस शोरगुल करती हुई भीड़ पेड़ों के अंतराल में रोशनी फेंकती और चंद्रमा की किरणों को पीछे ढकेलती चीड़-कुंज में आ घुसी. उस भीड़ में यानयान की बूढ़ी होती मां, उसका गूंगा बड़ा भाई और हुंग शी की बहन यांगह्वा शामिल थे. हुंग शी ने उस भीड़ में लोहा पहाड़ एवं कस्बे से आये सात-आठ हट्टे-कट्टे आदमियों को भी देखा जिनकी पीठ पर धनुष-बाण लटके हुए थे. बाकी लोग लम्बे बांस या शिकारी राइफलें और चिड़िया पकड़ने वाले जाल लिए हुए थे. एक चौड़ी पेटी से कमर पर कस कर बंधी जैतूनी सलेटी वर्दी में एक सुदर्शन युवक सर्विस रिवाल्वर लिए हुआ था. हुंग शी ने पहचान लिया कि वह एक स्थानीय पुलिसवाला था.

हुंग शी के चेहरे पर लगी रक्तिम खरोंचों को गौर से देखते हुए लोहा पहाड़ ने उससे जानना चाहा,

“यह कैसे हुआ?”

उसने जबाब दिया, “कुछ तो नहीं.”

“वह है कहां?” यानयान की मां ने ज़ोर से पूछा.

किसी ने पेड़ की चोटी की तरफ सीधे यानयान के चेहरे पर फ्लैशलाइट चमकायी. पेड़ की सबसे ऊंची टहनियों में खड़खड़ाहट हुई और एक काली छाया उस पेड़ से दूसरे पेड़ की चोटी पर चुपचाप सरक गयी.

“तुम हरामियी!” यानयान की मां गरियाते हुए बोली, “मैं जानती हूं कि तुम लोगों ने मेरी बेटी को जान से मार डाला है और इस बूढ़ी विधवा और उसके यतीम बच्चे को चकमा देने के लिए एक कहानी गढ़ ली है. क्या कोई लड़की किसी उल्लू की तरह उड़ सकती है?”

“शांत हो जाओ, चाची,” लोहा पहाड़ ने उसे समझाते हुए कहा, “यदि हम यह अपनी आंखों से न देखते तो हमने भी इस पर विश्वास न किया होता. मैं तुमसे पूछता हूं कि क्या तुम्हारी बेटी ने कभी किसी उस्ताद की शागिर्दी की है, क्या उसने कुछ जादू-टोना सीखा है या कि वह चुड़ैलों और ओझाओं के साथ रही है?”

“मेरी बेटी ने किसी उस्ताद से कुछ नहीं सीखा,” यानयान की मां ने उत्तर दिया, “न ही उसने कोई जादू-टोना सीखा और निश्चय ही उस का सम्बंध चुड़ौलों या ओझाओं से नहीं रहा है. जब वह बड़ी हो रही थी तो मैंने कभी भी उसे अपनी नज़रों से ओझल नहीं होने दिया और उसने वही किया जो उसे कहा गया. सारे पड़ोसी कहते थे मेरी बेटी कितनी अच्छी है. और अब वही अच्छी लड़की तुम्हारे घर में बस एक दिन बिताती है और पेड़ की फुगनी पर बैठी एक उकाब में बदल जाती है. यह कैसे हो गया? यह जान लो, मैं तब तक चैन से नहीं बैठूंगी जब तक कि मैं यह न पता लगा लूं कि तुम लोगों ने उसके साथ किया क्या है. मुझे यानयान लौटा दो, नहीं तो तुम्हें यांगह्वा कभी वापस नहीं मिलेगी.”

“अब बकबक बहुत हो चुकी, बूढ़ी चाची,” पुलिसवाला उसे डपट कर बोला, “बस अपनी निगाहें पेड़ की चोटी पर जमाए रखो.” यह कह कर उस ने अपनी फ्लैशगन पेड़ की चोटी की तरफ घुमायी और स्विच दबा कर उसकी रोशनी यानयान के चेहरे पर फेंकी. यानयान अपनी बांहों को फड़फड़ाते हुए हवा में उठी और एक अन्य वृक्ष की चोटी पर सरक गयी.

“तुमने उसे देखा क्या, बूढ़ी चाची?” पुलिसवाले ने पूछा.

“हां,” यानयान की मां ने उत्तर दिया.

“क्या वही तुम्हारी बेटी है?”

“हां, वही मेरी बेटी है.”

“जब तक कि मजबूरी न हो, हम कोई कठोर कदम नहीं उठाना चाहते, “पुलिसवाले ने उसे समझाया, “यदि तुम उसे वहां से नीचे आने के लिए कहोगी तो वह तुम्हारी बात ज़रूर सुनेगी.”

उस समय यानयान का गूंगा भाई, उस की तरफ अपनी बाहों को इस तरह से हिलाते हुए मानो अपनी बहन के उड़ने के हाव-भाव की नकल कर रहा हो, बेचैनी से घुरघुराने लगा.

यानयान की मां रोते हुए बोली, “मैंने अपने पिछले जन्म में ऐसा क्या किया था जो यह मुसीबत मेरे सिर पर पड़ी.”

“बूढ़ी चाची”, पुलिसवाले ने हिदायत दी, “रोने के बजाय अपनी बेटी को वहां से नीचे ले आने पर ध्यान दो.”

“वह हमेशा से एक मज़बूत इच्छा-शक्ति वाली लड़की रही है. हो सकता है वह मेरी बात ही न सुने,” यानयान की मां ने दुःख के साथ यह स्वीकार किया.

“यह संकोच का वक्त नहीं है, बूढ़ी चाची,” पुलिस वाला आजिज़ी से बोला, “उसे नीचे बुलाओ तो!”

छोटे-छोटे तलवे वाले पैरों से संकुचित कदम रखते हुए यानयान की मां उस पेड़ के पास पहुंची जिस पर उसकी बेटी बैठी थी, अपना सिर पीछे की तरफ टेढ़ा किया और रुआंसी हो ज़ोर से बोली, “यानयान, एक अच्छी लड़की की तरह अपनी मां की  बात सुनो. कृपया नीचे आ जाओ… मैं जानती हूं, तुम्हें लगता है कि तुम्हारे साथ बुरा हुआ है किंतु अब इसका कोई इलाज नहीं है. यदि तुम नीचे नहीं आती तो हम यांगह्वा को अपने पास नहीं रख सकेंगे और यदि ऐसा हुआ तो हमारा वंश समाप्त हुआ ही समझो…” यह कह कर बूढ़ी औरत ने पेड़ के तने पर अपना सिर दे मारा और फूट-फूट कर रोने लगी. उस समय ऐसा आभास हुआ मानो चिड़िया के पंख फड़फड़ाने का स्वर पेड़ की चोटी से नीचे उतर आया हो.

“उसे बातों में लगाए रखो”, पुलिसवाले ने ज़ोर दे कर हिदायत दी.

गूंगा ऊपर बैठी अपनी बहन की ओर बांहें हिलाता हुआ ज़ोर से फिर घुरघुराने लगा.

“यानयान,” हुंग शी ने चिल्ला कर उसे संबोधित किया, “तुम अभी इंसान हो, हो कि नहीं? यदि तुम में ज़रा भी मानवता बाकी है तो तुम तुरंत वहां से नीचे आ जाओ.”

यांगह्वा भी रोने लगी और बोली “भाभी, भगवान के लिए नीचे आ जाओ. इस दुनियां में तुम और मैं दोनों ही पीड़िताएं हैं. मेरा भाई कुरूप ज़रूर है पर कम से कम वह बात तो कर सकता है. तुम्हारा भाई तो… कृपा कर नीचे आ जाओ… हमारी यही किस्मत है…”

यानयान फिर हवा में उठी और नीचे खड़े लोगों के ऊपर आकाश में मंडराई. कुछ सर्द ओस-कण ज़मीन पर गिर पड़े. हो सकता है वे उसी के अश्रु-बिंदु हों.

“रास्ते से हटो, जगह बनाओ और उसे ज़मीन पर उतरने दो,” लोहा पहाड़ ने भीड़ को हुक्म दिया.

बूढ़ी और यांगह्वा के अतिरिक्त सभी पीछे हट गये. किंतु वैसा हुआ नहीं जैसी लोहा पहाड़ को आशा थी. यानयान हवा में उनके ऊपर मंडराने के पश्चात फिर से पेड़ की चोटी पर बैठ गयी. चांद पश्चिमी आकाश में उतर गया था. रात गहरा रही थी. ज़मीन पर खड़े लोगों को थकान एवं ठंड लगने लगी थी.

“मेरा ख्याल है कि हमें अब यह काम तनिक टेढ़े तरीके से करना पड़ेगा,” पुलिसवाले ने कहा.

इस पर लोहा पहाड़ बोला, “मैं इस बात से चिंतित हूं कि भीड़ कहीं उसे वृक्ष-कुंज से दूर न भगा दे, और यदि हम उसे आज रात ही नहीं पकड़ लेते तो बाद में यह उतना ही कठिन हो जाएगा.”

“पर जहां तक मैं समझता हूं”, पुलिसवाले ने अपना मत व्यक्त किया, “उसमें लम्बी दूरी तक उड़ने की क्षमता नहीं है, जिसका तात्पर्य यह है कि यदि वह इस कुंज से बाहर हो जाए तो उसे पकड़ना असलियत में आसान हो जाएगा.”

“किंतु यदि उसके मायके वाले न तैयार हुए तो,” लोहा पहाड़ ने अपनी चिंता जतायी.

“मैं देखता हूं”, पुलिसवाले ने उसे आश्वस्त किया. उसने थोड़ा परे हट कर कुछ युवकों से गूंगे एवं उसकी मां को   चीड़ के वृक्ष-कुंज से बाहर ले जाने के लिए कहा, जिसका चिल्ला-चिल्ला कर सुस्त पड़ चुकी बूढ़ी औरत ने कोई प्रतिवाद नहीं किया. गूंगे ने अवश्य अपनी आपत्ति घुरघुराई किंतु जैसे ही पुलिसवाले ने अपनी सर्विस रिवाल्वर चमकायी, वह चुपचाप चला गया. अब घटनास्थल पर पुलिसवाला, लोहा पहाड़, हुंग शी और दो ऐसे युवक ही बाकी रह गये जिनमें से एक के हाथ में एक बांस था और दूसरा चिड़िया पकड़ने का एक जाल लिये हुए था.

“गोली चलाने से हो सकता है लोग भयभीत हो जाएं,” पुलिसवाले ने कहा, “इसलिए धनुष-बाण का प्रयोग करके देखा जाए.”

“मेरी नज़र कमज़ोर होने के कारण”, लोहा पहाड़ बोला, “मैं यह न कर पाऊंगा. यदि मेरा निशाना ज़रा भी इधर-उधर हुआ, तो वह मर भी सकती है. यह काम हुंग शी करे.”

लोहा पहाड़ ने बांस का बना धनुष और पंखों से सजा एक पैना तीर हुंग शी को थमाया. उसने उसे ले तो लिया पर गहरे सोच में डूब गया. “मैं यह नहीं कर सकता”, हुंग शी अचानक मानो नींद से जाग कर बोला, “मैं नहीं कर सकता, मैं नहीं करूंगा. वह मेरी पत्नी है, है कि नहीं? मेरी पत्नी!”

“हुंग शी,” लोहा पहाड़ ने उसे डांटा, “मूर्ख मत बनो! वह जब तक तुम्हारी बांहों में है तभी तक तुम्हारी पत्नी है. जो पेड़ की चोटी पर बैठी है, वह किसी किस्म की एक विचित्र चिड़िया मात्र है.”

“तुम लोग,” पुलिसवाला झुंझला उठा “क्या तुम लोग कुछ कर नहीं सकते? यदि हाथ झुलाते हुए तुम्हें मात्र खड़े ही रहना है तो वह धनुष और बाण मुझे दो.” यह कह कर उसने अपनी रिवाल्वर कमर में खोंसी, धनुष-बाण उठा कर पेड़ की चोटी पर बैठी आकृति पर निशाना लगाया और तीर छोड़ दिया. दबी हुई धम-सी आवाज़ से सबको पता चल गया कि तीर निशाने पर लगा है. लोगों ने देखा कि पेड़ की चोटी पर पत्तियों में खड़खड़ाहट हुई और यानयान, जिसके पेट में तीर चुभा था, चांद की रोशनी में नमूदार हो नज़दीक के एक छोटे पेड़ पर धराशायी हो गयी. ज़ाहिर था कि वह अपना संतुलन बरकरार नहीं रख पायी थी. पुलिसवाला धनुष पर एक और तीन चढ़ा छोटे चीड़ के पेड़ के ऊपर हाथ- पैर फैलाए पड़ी यानयान की तरफ निशाना लगा कर चिल्लाया, “यहां नीचे आ जाओ!” इसके पूर्व कि उसकी चिल्लाहट की गूंज डूबती, दूसरा तीर चल गया. दर्द भरी एक चीख सुनाई दी और यानयान लुढ़कती हुई सिर के बल ज़मीन पर आ गिरी.

“तुम हरामी चो…”, हुंग शी क्रोध से चीख उठा, “तुमने मेरी पत्नी को मार डाला…”

जो लोग वृक्ष-कुंज से चले गये थे, अपनी लालटेन एवं टॉर्च लिए वापस आ गये.

“क्या वह मर गयी?” उन्होंने उत्सुकता से पूछा, “क्या उसके शरीर पर पंख लगे हुए हैं?”

बिना एक शब्द कहे, लोहा पहाड़ ने कुत्ते के खून से भरी बाल्टी उठायी और खून यानयान के शरीर पर उड़ेल दिया.

(फ़रवरी, 2014)

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