अखबारों में लिपटा हुआ बच्चा

♦   यूकिओ मिशिमा  

तोशिको का पति हमेशा ही व्यस्त रहता था. आज रात भी उसे किसी से मिलने के लिए जल्दी में जाना पड़ा, और वह उसे टैक्सी में घर जाने के लिए अकेली छोड़ गया. आखिर अभिनेता की पत्नी और आशा भी क्या कर सकती है? काश, उसका पति समझ पाता कि उसे घर जाने से कितना डर लग रहा था, जिस घर में फर्श पर अभी तक खून के धब्बे पड़े हुए थे.

तोशिको बचपन से ही अत्यंत भावुक थी और लगातार चिंतित रहने के कारण बड़ी कमज़ोर-सी लगती थी. उसे देखकर किसी पारदर्शी चित्र का खयाल हो आता था.

उस दिन शाम को जब तोशिको अपने पति के साथ एक नाइट-क्लब में बैठी हुई थी. पति ने अपने दोस्तों के सामने ‘उस दुर्घटना’ का जिस प्रकार वर्णन किया, उसे सुनकर वह सन्न रह गयी थी. और उसे अपना पति कोई पराया व्यक्ति लगता था.

‘बड़ी दिलचस्प कहानी है,’ उसके पति ने कहना शुरू किया थाö ‘जब आया हमारे बच्चे की देखभाल के लिए आयी, तो मेरा ध्यान सबसे पहले उसके पेट की ओर गया. बड़ा विशाल पेट था. देखते ही मैं सोचने लगा कि यह अकेली इतना खाना खाया करेगी, जितना हम सब मिलकर खाते हैं.’

… खैर, परसों हमने अपने बच्चे के कमरे में से चीखने और कहराने की आवाज़ें सुनी. हम भागकर वहां गये, तो क्या देखते हैं कि वह फर्श पर लेटी हुई है, और दोनों हाथों से अपना पेट थामे किसी गाय की तरह कराह रही है. उसके पास ही चारपाई पर पड़ा हुआ हमारा बच्चा रोते-रोते लाला-पीला बना हुआ है…. दृश्य ऐसा था कि देखते ही बनता था.

‘आखिर राज खुला न!’ पास बैठे एक अभिनेता ने कहा.

‘बिलकुल! मेरी तो आंखें फटी-की-फटी रह गयीं. तभी मैंने फर्श पर बिछा महंगा गलीचा हटाया, और उसकी जगह एक कंबल भिछा दिया, ताकि आया उस पर लेट जाये. लेकिन वह थी कि जख्मी सूअर की तरह चीखे जा रही थी. डाक्टर के आने तक बच्चा जन्म ले चुका था. लेकिन हमारे उस कमरे की ऐसी दुर्गति बन गयी थी कि कुछ न पूछिये.’

‘वह तो बननी ही थी,’ एक और दोस्त ने कहा, और सभी खिलखिलाकर हंस पड़े.

तोशिको नहीं हंसी. उसे अपने पति से डर लगने लगा. एक क्षण के लिए उसने आंखे बंद की, तो उसके सामने आया का नया जनमा बच्चा आ गया, जो फर्श पर पड़ा हुआ था और जिसका कमज़ोर-सा शरीर खून के धब्बों से भरे अखबारी कागजों में लिपटा हुआ था.

तोशिको जानती थी कि अवैध बच्चे को जन्म देने वाली आया के लिए डाक्टर के मन में अच्छे भाव नहीं हैं. तभी तो उसने अपने सहायक से कह दिया कि उसे अखबार में लपेट दो. एक नवजात बच्चे के प्रति डाक्टर का यह व्यवहार तोशिको को अच्छा नहीं लगा था. डाक्टर और पति के चले जाने पर वह अलमारी में से फलालेन का एक नया टुकड़ा निकाल लायी थी, और उसने बच्चे को उसमें लपेट दिया था. फिर उसे बड़ी सावधानी से आराम-कुर्सी पर लिटा दिया था. यह बात उसने अपने पति को नहीं बतायी थी कि वह उसे ज़रूरत से ज़्यादा भावुक समझ ले और उसका मज़ाक उड़ाने लगे.

कागजों में लिपटे बच्चे का दृश्य बाद में भी कई बार तोशिको से सामने आया था, और वह उसे सहन नहीं कर पायी थी. वह उसे कसाई की दुकान के दृश्य से मेल खाता हुआ प्रतीत होता था. तोशिको को अवैध बच्चे की घिनौनी हालत पर तरस आता था.

एक मैं ही हूं, जिसने बच्चे की वह खतरनाक हालत देखी है. कई बार उसके मन में यह विचार आया. उस भयानक दृश्य को मैं  कभी अपनी यादों में से निकाल नहीं सकूंगी. जब वह काहजों में लिपटा हुआ था, तो उसकी मां ने उसे नहीं देखा था. वह तो उस समय बेसुध पड़ी थी. हां, सिर्फ मैंने ही उसे उस हालत में देखा है. उसे याद करके मन में गुनाहों का अहसास पैदा होता है. कैसी अजीब बात है यह! लेकिन मैं ही तो थी, जिसने बाद में उसे फलालेन में लपेटकर आराम-कुर्सी पर लिटाया था…

पति उसे टैक्सी में बैठाकर अपनी कार की ओर बढ़ गया, तो तोशिको उसे जाते हुए देखने लगी. वह उसकी ओर मुड़कर मुस्कराया.. तभी टैक्सी चल पड़ी, और तोशिको ने सीट पर पीठ टिका दी.

टेक्सी ऐसी सड़क पर से गुजर रही थी, जिसके दोनों ओर कहीं-कहीं शराबखाने थे. आगे एक थियेटर आया. उसके सामने, सजावट के लिए लगाये गये चेरी-पुष्पों को देखकर तोशिको को लगा कि ये फूल आखिर सफेद कागज के टुकड़े ही तो हैं.

कुछ आगे चलकर तोशिको को आया के बच्चे का खयाल आया और वह उसके बारे में सोचने लगी. अगर उस बच्चे को अपने जन्म के सम्बंध में कुछ भी बताया न जाये, तो क्या बड़ा होकर वह इज्जतदार आदमी बन सकेगा? तोशिको ने मन में सोचा. क्या वे अखबारी कागज उसके पूरे जीवन का प्रतीक बने रहेंगे? मगर मैं उसकी इतनी चिंता क्यों कर रही हूं? क्या इसलिए कि मैं अपने बच्चे के भविष्य के बारे में बेचैन हूं? आज से लगभग बीस साल बाद, जब हमारा बच्चा बड़ा हो जायेगा, सुंदर, शीष्ट, सुशिक्षित जवान बन जायेगा, तो क्या पता, जिंदगी के किसी मोड़ पर उसकी मुलाकात आया के इस बच्चे से हो, जो स्वयं भी तब बीस साल का जवान होगा. और तब क्या पता, यह लड़का आया का बेटा, जिसके साथ जिंदगी ने शायद अन्याय किया होगा, बदला लेने के लिए, एकाएक चाकू निकालकर मेरे बेटे पर वार कर दे…

यह सोचकर तोशिको कांप उठी.

नहीं, तब मैं खुद उसके पास जाऊंगी, और उसे सब कुछ बता दूंगी कि किस तरह मैंने उसे अखबारी कागजों में से निकालकर फलालेन में लपेटा था. तब वह मेरे बेटे से बदला लेने की बात नहीं सोच सकेगा… आज से बीस साल बाद वह बेहद दुख झेल रहा होगा. गरीबी में मुसीबतों भरी जिंदगी जी रहा होगा. और बहुत निराशा और एकाकी होगा. आखिर इस तरह जन्म लेने वाले बच्चे की जिंदगी का अंत और हो ही क्या सकता है? वह अपने आपको गालियां दे रहा होगा, अपनी मां को कोस रहा होगा.

टैक्सी ब्रिटिश राजदूतावास के आगे से गुजरी, तो तोशिको की नजर सामने स्थित चेरी-वृक्षों के प्रसिद्ध बगीचे पर पड़ी. चेरी-पुष्पों की ताजगी में उसे पवित्रता दिखाई दी. उसके मन में आया कि टैक्सी से उतरकर उन चेरी-पुष्पों को नजदीक से देखे. तोशिको जैसी भीरु युवती के लिए यह एक अजीब-सा साहसपूर्ण विचार था. लेकिन उस समय उसकी मनोदशा भी तो अजीब थी, और उसे घर जाने से डर लग रहा था.

वह टैक्सी से उतरी और चौड़ी सड़क पार करके चेरी-वृक्षों की ओर बढ़ी. चारों ओर रात का अंधेरा फैला था, और उस अंधेरे में वह निपट अकेली लग रही थी.

आज रात सारा बाग-चेरी पुष्पों से भरा हुआ था. बादलों-सफेदी-भरें आकाश के नीचे सफेदी-ही-सफेदी नजर आ रही थी. पेड़ों के बीच में जो कागज की कंदीलें लटकी हुई थी, बुझा दी गयी  थीं. उनकी जगह बिजली के बल्ब लटक रहे थेö लाल, पीले, हरे. अधिकांश लोग सैर करके अब तक अपने घरों को लौट गये थे, और इक्के-दुक्के लोग ही नजर आते थे. चलते हुए ये लोग कभी किसी खाली बोतल को ठोकर मारते, कभी किसी रद्दी कागज को पांव तले कुचलते.

अखबारी कागज! तोशिको सोचने लगी. खून के दागों वाले अखबारी कागज! अगर किसी आदमी को पता लगे कि पैदा होने पर उसे अखबारी कागजों में लपेटा गया था, तो वह अपनी जिंदगी ही तबाह कर बैठे.

तोशिको बाग में आगे बढ़ती गयी. एक जगह उसने दो व्यक्तियों को पत्थर की बेंच पर पास-पास बैठे देखा. और भी कहीं-कहीं जोड़ों के रूप में लोग दिखाई दे रहे थे. उसकी ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा था.

कुछ आगे जाने पर उसर पत्थर की एक बेंच पर कोई पीली-सी चीज़ दिखाई दी. उसने पहले सोचा, चेरी-पुष्पों का ढेर होगा, फिर सोचा, किसी का कोई कपड़ा भूल से यहां छूट गया होगा. लेकिन नजदीक जाने पर पता चला कि कोई आदमी लेटा हुआ है. कोई शराबी हो शायद, तोशिको ने सोचा. लेकिन नहीं, यह शराबी नहीं हो सकता, क्योंकि इसने अखबारी कागज ओढ़ रखे हैं. तोशिको ने और नजदीक जाकर देखा, तो पता पाया कि आदमी सोया हुआ है.

आदमी ने भूरे रंग की जर्सी पहन रखी थी. उसके नीचे भी अखबारी कागज थे, और ऊपर भी अखबारी कागज थे. सिर के बाल गंदे और उलझे हुए थे. उसे देखते हुए तोशिकों को आया के बच्चे का खयाल हो आया. और उसे लगा कि उसके सामने आ गये हैं. सामने लेटे आदमी का माथा पीला था, उस पर झुर्रियां थीं और दुखों-मुसीबतों के निशान थे. वैसे उम्र से वह जवान लगता था. उसका चेहरा पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा था. एकाएक तोशिको के दिल में लालसा पैदा हुई कि उसका चेहरा देखे और वह उस लालसा को दबा न सकी.

उसने झुककर देखा. आदमी ने बांहों से चेहरा ढक रखा था. थोड़ा-सा भाग ही दिखाई देता था. उसकी घनी-घनी भौंहें थीं, और तराशी हुई नाक थी. और मुंह कुछ खुला हुआ था.

तोशिको उसे बड़े गौर से देख रही थी कि कागजों में सरसराहट पैदा हुई, और उसी समय आदमी ने आंखें खोल दीं. अपने बिलकुल निकट एक नौजवान स्त्राr को देखकर वह झटके से उठा और उसकी आंखें चमकीं. दूसरे ही क्षण उसके बलिष्ठ हाथ ने तोशिको की पतली-सी कलाई पकड़ ली.

तोशिको डरी नहीं, और न उसने उसके हाथ से छूटने की कोशिश ही की. तभी जैसे बिजली कौंध गयी हो, उसे खयाल आयाö तो बीस साल बीत भी गये हैं!

फरवरी  1971 

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