अक्टूबर 2007

Cover - Oct. 07

 

शब्द-यात्रा

खल के वचन संत सहें जैसे  

आनंद गहलोत

पहली सीढ़ी 

जहां सूरज ही सूरज है

स्वामी संवित् सोमगिरि

आवरण-कथा

अहिंसा एक संस्कृति है

नारायणभाई देसाई

अहिंसा का पहला द्वार

आचार्य महाप्रज्ञ

अहिंसा वीरस्य भूषणम्

हूबनाथ

मेरी पहली कहानी

मौत से रूबरू और विकास का ज़रिया

सुधा अरोड़ा

आलेख

किससे पूछूं कहां छिपी है मेरी आंखें

केदारनाथ सिंह

अपनी भाषा से प्यार करने का अर्थ

नारायण दत्त

एक कसक जो दिल में रह गयी

जयप्रकाश नारायण

गांधी के इस बेटे को समझना अभी बाकी है

गोपालकृष्ण गांधी

देश बचाना है तो गांधी चर्चा चलती रहनी चाहिए

धर्मपाल अकेला

भरी दोपहरी में अंधेरा

जयंत नार्लीकर

महाराष्ट्र का राज्यपशु – दैत्याकार गिलहरी 

डॉ. परशुराम शुक्ल

अमीर खुसरो : एक बुलंद शख्सियत

डॉ. सुनील केशव देवधर

क्या रामरावण युद्ध आण्विक था?

प्रमोद  भार्गव

जाने कहांकहां से गुज़रना पड़ता है

डॉ. राजम नटराजन पिल्लै

किताबें

अहिंसा के नौ दशक

पी. साईनाथ

आंखें ही ज़रूरी नहीं हैं देखने के लिए

निदा फ़ाज़ली

हम क्या बटोरें

स्वामी पार्थसारथी

आभार

रामनंदन

व्यंग्य

चांद की यात्रा और टेंडर

शरद उपाध्याय

कहानी

संदेश

नरेंद्र कोहली

नीली धूप

सुनील गंगोपाध्याय

क्यों

गौतम सचदेव

बेखबरी का फ़ायदा (लघुकथा)

सआदत हसन मंटो

कविताएं

दो कविताएं

डॉ. ओमप्रकाश सिंह

विज्ञान पुरुष का आविर्भाव

श्री अरविंद

नारी

योगेश्वर कौर

सदियों तक हम शिला रहेंगे

सत्येंद्र कुमार रघुवंशी

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