चलो लोकशाला चलें! –  रमेश थानवी

विद्यालय के लिए एक प्रचलित शब्द है ‘पाठशाला’ और दूसरा प्रचलित शब्द है ‘विद्याशाला’. दोनों शब्दों का स्थान लगभग सभी प्रदेशों में स्कूल ने ही ले लिया है. स्कूल से आशय ऐसे स्थान से है जहां अपनी विद्या आरम्भ करने…

एक अपराधी, एक लेखक, एक संत – – सुनील गंगोपाध्याय

न्यूड स्टडी फ्रांसीसी कला से अंतरंग भाव से जुड़ी हुई है. कविता-उपन्यास में कैसा ही वर्णन हो, किसी भी शब्द को वह अश्लील नहीं मानती है. उन दिनों फ्रांसीसी साहित्य में जां-जेने को लेकर खूब चख-चख मची हुई थी. जेने…

शरणम् – नरेंद्र कोहली (धारावाहिक उपन्यास – 4)

धृतराष्ट्र को कुछ व्याकुल देख, संजय ने पूछा- ‘कुछ चाहिए महाराज?’ ‘थोड़ा जल.’ धृतराष्ट्र ने कहा- ‘और संजय, चलो, हम गंगा-तट वाली वाटिका में बैठें? उस दिशा में वातास का बड़ा सुख है.’ धृतराष्ट्र आशंकित था कि यदि कहीं गांधारी…

दो कविताएं – डॉ. सुनीता जैन

  घरघराहट इस बंद घर की सारी खिड़कियां खुली हैं पर खिड़कियों में न चिड़ियां हैं, न हवा न चांद की कंदील, न सूखे पत्तों का दिठौना इतिहास तो है हर आले और चौखट में घर की लेकिन कमरों का…

कर्नाटक की राजकीय मछली  : कावेरी केन्डई – डॉ. परशुराम शुक्ल

राज-मछली  साइप्रिनिडी परिवार के मछली कावेरी केन्डई का वैज्ञानिक नाम पंटियस कर्नाटिकस है. अंग्रेज़ी में इसे कर्नाटिक कार्प कहते हैं. कावेरी केन्डई विश्व में कर्नाटक कार्प के नाम से प्रसिद्ध है. सामान्यतया एक मछली को अपने वैज्ञानिक नाम से ही…

मैं प्रतीक्षा में हूं  –  शरद जोशी 

स्मरण (वर्ष 2016 स्वर्गीय शरद जोशी की 85वीं सालगिरह का वर्ष है. (जन्म : 21 मई, 1931) वे आज होते तो मुस्कराते हुए अवश्य कहते, देखो, मैं अभी भी सार्थक लिख रहा हूं. यह अपने आप में कम महत्त्वपूर्ण नहीं है कि…